जयपुर। सीधी लाइन खींचना जिस तरह मुश्किल काम है उसी तरह सीधी बात कहना भी कई बार जटिल होता है, यहां साहित्यकार का काम शुरू होता है। अपनी रचनाओं में गूढ़ सत्य को बिल्कुल स्पष्ट तरीके से कहा जाए जिससे आम आदमी तक वह पहुंच सके। जवाहर कला केंद्र की ओर से आयोजित ‘संवाद प्रवा’ह के दूसरे दिन शुक्रवार को साहित्यकार डा.संदीप मील ने यह बात कही। ईमा ननगी नतम बाक्ता नाटक के निर्देशक हैसनम तोम्बा और सूत्रधार अशोक बांठिया भी चर्चा में शामिल रहे। नाटक को आधार मानकर रंगमंच व साहित्य पर इस दौरान वार्ता हुई।
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नाटक में जो भी हो दिल से हो- हैसनम तोम्बा
हैसनम तोम्बा ने मणिपुरी थियेटर की विशेषता बताते हुए अन्य थियेटर फॉर्म पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि अभिनय को दिल से किया जाना चाहिए, दर्शक को यह न लगे कि अभिनय किया जा रहा है। चर्चा के दौरान यह सवाल भी उठा कि थियेटर के लिए समाज की धारणा कब बदलेगी। किस दिन अन्य पेशों की तरह बच्चों को थियेटर अपनाने के लिए छूट मिल पाएगी। गौरतलब है कि साहित्य को संबल प्रदान करने के लिए जवाहर कला केंद्र की ओर से संवाद प्रवाह का आयोजन किया जा रहा है। इसमें भारत रंग महोत्सव के दौरान होने वाले नाटकों पर निर्देशकों व साहित्यकारों के बीच चर्चा की जाती है। इसी कड़ी में शनिवार सुबह 11 बजे निर्देशक नीलेश दीपक और साहित्यकार पद्मश्री चन्द्र प्रकाश देवल के बीच वार्ता होगी।