जयपुर। ज्येष्ठ शुक्ल पक्ष की एकादशी पर बुधवार को निर्जला एकादशी (निर्जला ग्यारस) मनाई जा रही है। सवार्थसिद्धि योग, रवि येाग, कुमार योग, राजयोग और आनंद योग का विशेष संयोग भी बना है। आज मंदिरों में जल विहार की झांकी के दर्शन होंगे, वहीं ठाकुरजी को भोग में ऋतु फल अर्पित किए जा रहे हैं।
ज्योतिषाचार्य डॉ. रवि शर्मा ने बताया कि निर्जला एकादशी मंगलवार दोपहर 1 बजकर 09 मिनट पर शुरू हुई, जो बुधवार दोपहर 1 बजकर 47 मिनट तक रहेगी। सर्वार्थसिद्धि योग सुबह 5.37 से 6 बजे तक रहा, वहीं आनंद योग, रवि योग व कुमार योग भी सुबह 6 बजे तक रहे। इस दिन राजयोग दोपहर 1.47 बजे से शुरू होगा, जो दूसरे दिन सूर्योदय तक रहेगा। उन्होंने बताया कि उदियात में विशेष संयोग बने, जिसका फल दिनभर रहेगा।
भीमसेनी एकादशी
ज्योतिषाचार्य डा. अनीष व्यास ने बताया कि महाभारत काल में पांडव पुत्र भीम ने भी इस एकादशी पर व्रत किया था। इसलिए इसे भीमसेनी एकादशी भी कहते हैं। इस एकादशी पर पूरे दिन पानी नहीं पिया जाता। एकादशी के दिन भगवान विष्णु की विधि-विधान से पूजा-अर्चना की जाती है।
निर्जला एकादशी पर शहर के आराध्य गोविंददेवजी सहित अन्य मंदिरों में जल विहार की झांकी सजेगी। ठाकुरजी का पंचामृत से अभिषेक करवाया गया। वहीं आम, तरबूज व खरबूजा सहित अन्य ऋतु फलों का भोग लगाया जा रहा है। भक्त मंदिरों में सुबह से ही जल से भरा मटका और ऋतु फल अर्पित कर रहे है। गोविंददेवजी मंदिर में आज शाम 5 बजे से 5.30 बजे तक ठाकुरजी जलविहार करेंगे।
शहर में आज जगह—जगह पिलाएंगे शर्बत
निर्जला एकादशी पर जल के दान का विशेष महत्व बताया गया है, इसलिए शहरभर में लोग जल का दान कर रहे हे। कई संगठनों-संस्थाओं की ओर से जगह-जगह स्टॉल लगाकर शर्बत और पानी का वितरण किया जा रहा है।