जयपुर। विश्व स्तनपान सप्ताह दुनियाभर में मनाया जाता है। एक अगस्त से शुरू होता है और 7 अगस्त तक मनाया जाता है। राजस्थान की बात करें तो प्रदेश का सबसे बड़ा मदर मिल्क बैंक जयपुर के जेके लोन अस्पताल में है। जहां सबसे ज्यादा मदर्स अपना मिल्क डोनेट करती है। मिल्क डोनेट कहना जितना सरल है, यह प्रक्रिया उतनी ही जटिल भी है। जटिल कहने का मतलब यह है कि जो महिलाएं होती है, वह आसानी से अपना मिल्क डोनेट नहीं करती है। कई महिलाओं में बच्चा दूध अपनी जरूरत के हिसाब से पीता है। बाकी दूध वेस्ट होता है। इस दूध को डोनेट करने के लिए जब महिलाओं को कहा जाता है तब उन्हें लगता है कि यह तो उनके बच्चे के हिस्से का दूध है। वह इस दूध को डोनेट क्यों करे।
कई महिलाओं को लगता है कि मिल्क डोनेट करने से उनके शरीर में कमजोरी आ जाएगी। ऐसे कई सवाल महिलाओं के जेहन में होते है। और इन सभी सवालों को सामना करना पड़ता है उन काउंसलर्स को। जिनकी ड्यूटी जे के लोन या अन्य अस्पतालों में बने मदर मिल्क बैंक में है।
जेके लोन अस्पताल के मदर मिल्क बैंक में काम करने वाली लैक्टेशन कांउसलर्स को महिलाओं को बहुत हद तक समझाना होता है। तब जाकर कई महिलाओं को मिल्क डोनेशन समझ आता है और वह डोनेट करती है। लेकिन कई महिलाएं फिर भी नहीं समझ पाती है। अच्छी बात यह भी है कि कई शहरी महिलाएं ऐसी भी आती है जिनकी कभी काउंसलिंग ही नहीं की गई। वह अपना मिल्क स्वत डोनेट करने आ जाती है। लेकिन ऐसी महिलाएं बहुत कम है।
महिलाओं को झेलनी पड़ती है यह परेशानियां…
मां बनने के बाद स्तनपान एक नेचुरल प्रोसेस है। अधिकांश मां धीरे-धीरे बच्चे को सही तरह से ब्रेस्टफीड कराना सीख जाती हैं, लेकिन हर मां और बच्चे के साथ ऐसा नहीं होता है। कभी बच्चे के सामान्य से अलग होने तो कभी मां को किसी तरह की समस्या होने की वजह से बच्चे को बेस्टफीडिंग कराने में दिक्कत आती है। वह सामान्य तरीके से स्तनपान नहीं करा पाती हैं। इस दौरान मदर मिल्क बैंक में काम करने वाली काउंसलर उनकी मदद करती है।
जेके लोन में मिल्क डोनेशन की स्थिति..
जेके लोन प्रदेश का सबसे बड़ा मदर मिल्क बैंक है। जहां जनवरी में 57, फरवरी में 37, मार्च में 11, अप्रैल में 43, मई में 32, जून में 12 और जुलाई में 23 महिलाओं की ओर से मिल्क का डोनेशन किया गया है।
इसलिए मदर मिल्क बैंक की जरूरत..
कई महिलाएं बच्चों को जन्म देती है, लेकिन संक्रमण की चपेट में आ जाती है। ऐसे में माँ कुछ चिकित्सकीय कारणों से अपने बच्चे को स्तनपान नहीं करा पाती है। ऐसे कई बच्चे हैं, जो इसी तरह की समस्याओं से जूझ रहे हैं। इन्ही बच्चों की जरूरत को मदर मिल्क बैंक के जरिए पूरा किया जाता है।
तीन तरह का होता है मदर मिल्क ..
फोर मिल्क – मां के शुरुआत में जो दूध आता है उसे फोरमिल्क कहते हैं। जिसमें अमीनो एसिड, प्रोटीन और विटामिन ज्यादा होते हैं।
मिड मिल्क – मिड मिल्क में फैट और कार्बोहाइड्रेट होते हैं।
हाई मिल्क – हाई मिल्क में कार्बोहाइड्रेट और शुगर ज्यादा होते हैं।
इनका कहना है..
जेके लोन अस्पताल में मदर मिल्क बैंक है। जहां महिलाएं मिल्क डोनेट करती हैं। जरूरतमंद बच्चों को वो दूध पिलाया जाता है। ऐसे बच्चे जो समय से पहले पैदा हुए हैं या फिर जिनका वजन कम है या कुछ ओर कारण है। उन्हें बैंक में उपलब्ध दूध उपलब्ध कराया जाता है।
डॉ अशोक गुप्ता
जेके लोन अस्पताल, जयपुर
महिलाओं में कई तरह की भ्रांतियां होती है। किसी को लगता है कि वह मिल्क डोनेट करने से कमजोर हो जाएगी तो किसी को कुछ। ऐसे में बहुत समझाइस करते है। तब जाकर कई महिला मिल्क डोनेट के लिए तैयार होती है।
मुक्ति कुमारी
लैक्टेशन काउंसलर, जेके लोन, जयपुर