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29 नवंबर को काली पट्टी बांधकर चेतावनी प्रदर्शन करेंगे कार्मिक

पुरानी पेंशन योजना लागू किए जाने सहित विभिन्न मांगों को लेकर अखिल राजस्थान संयुक्त कर्मचारी महासंघ के आह्वान पर 29 नंबवर से सभी कार्मिक काली पट्टी बांधकर चेतावनी प्रदर्शन करेंगे।

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जयपुर

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Rakhi Hajela

Nov 26, 2021


1 से 3 दिसंबर तक होगा प्रशासन गांवों और शहरों के संग अभियान का बहिष्कार
जयपुर।
एसीपी के स्थान पर चयनित वेतनमान पुन: बहाल किए जाने, वेतन कटौती का आदेश प्रत्याहारित किए जाने, केंद्र के समान वेतन भत्ते स्वीकृत किए जाने, नवीन पेंशन योजना समाप्त कर पुरानी पेंशन योजना लागू किए जाने सहित विभिन्न मांगों को लेकर अखिल राजस्थान संयुक्त कर्मचारी महासंघ के आह्वान पर 29 नंबवर से सभी कार्मिक काली पट्टी बांधकर चेतावनी प्रदर्शन करेंगे। इसके बाद एक से तीन दिसंबर तक प्रशासन गांवों और शहरों के संग अभियान का बहिष्कार कर सभी उपखंड मुख्यालयों पर प्रदर्शन किया जाएगा। शिविरों के बहिष्कार में पटवारी, ग्राम विकास अधिकारी,कृषि पर्यवेक्षक, कानूनगो, महिला बाल विकास, आयुर्वेद, पशु चिकित्साकर्मी, जलदाय कर्मी, नर्सेज आदि प्रमुख संवर्गो शामिल होंगे। महासंघ के प्रदेशाध्यक्ष आयुदान सिंह कविया, प्रदेश महामंत्री तेज सिंह राठौड़ ने कहा कि यदि इसके बाद भी सरकार ने उनकी मांगों पर सुनवाई नहीं की तो महासंघ आंदोलन करने का निर्णय ले सकता है। उन्होंने कहा कि
वर्कचार्ज कर्मचारियों को नियमित करने के अनुरूप एक ही आदेश से समस्त संविदा, समेकित वेतन आधारित कार्मिकों को नियमित किए जाने, कोविड से मृत कार्मिकों को 50 लाख रुपए की अनुग्रह राशि स्वीकृत किए जाने की भी मांग कर रहे हैं। महासंघ की संघर्ष समिति के प्रदेश संयोजक महावीर प्रसाद शर्मा ने सरकार को चेतावनी देते हुए कहा कि सरकार कर्मचारी शक्ति को कमतर आंक रही है। आगामी 01 से 03 दिसम्बर को होने बहिष्कार से यह साबित हो जाएगा कि सरकार कर्मचारियों को नजरअंदाज नहीं कर सकती। राज्य कर्मियों ने असहयोग का निर्णय लिया है जिसके कारण आमजन को मिलने वाली सुविधाओं जैसे पट्टा वितरण,राजस्व संबंधी कार्य, कृषि संबंधी कार्य आदि महत्वपूर्ण कार्य रुक जाएंगे। उन्होंने कहा कि सरकार में नौकरशह निरंकुश हो गए हैं जिनके कारण सरकार कर्मचारी विरोधी फैसले ले रही है। मुख्यमंत्री ने 28 मई 2021 को जारी परिपत्र में निर्देश दिए थे कि शासन सचिव महासंघ व सेवासंघों से वार्ता कर मांगों का निस्तारण करेंगे परन्तु नौकरशाहों ने मुख्यमंत्री के आदेशों में रद्दी में डाल दिया और सरकार अपने वादे से मुकर गई।