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साबरी बदर्स ने जब सुनाया ‘वो पर्दानशीं’ तो हुआ कुछ ऐसा…
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साबरी बदर्स ने जब सुनाया ‘वो पर्दानशीं’ तो हुआ कुछ ऐसा…

-जेकेके में सजी कव्वाली की महफिल-साबरी ब्रदर्स ने सूफी कलामों से बांधा समां-श्रोताओं की दाद बटोरीं

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जयपुर

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Savita Vyas

Sep 15, 2019


जयपुर। kawwali festival 2019 : जेकेके के रंगायन सभागार में कव्वाली फेस्टिवल के अंतिम दिन नामचीन कव्वाल साबरी ब्रदर्स ने महफिल सजाई। नोर्थ जोन कल्चरल सेंटर पटियाला की सहभागिता में आयोजित इस फेस्टिवल में उस्ताद सईद साबरी, उस्ताद फरीद साबरी, उस्ताद अमीन साबरी एवं गु्रप ने कव्वाली और शेर सुनाए। ‘हम्द’ के कलामों के साथ कव्वाली का सिलसिला शुरू हुआ।
इसके बाद सूफी और रूमानी कलाम पेशकर कव्वालों ने श्रोताओं की दाद बटोरीं। कव्वालों ने ‘वो पर्दानशीं हर शह में मकी है, पूछों तो कहीं नहीं, देखो तो यहीं है…, और हजरत अमीर खुसरो के कलाम ‘ऐ री सखी मोरे पिया घर आए…, सुनाकर श्रोताओं की दाद बटोरी। साबरी बदर्स ने इश्क-ए-हकीकी और इश्क-ए-मजाजी से लबरेज कलामों को प्रस्तुत कर सुधि श्रोताओं को भी प्रभावित किया। कलाकारों के साथ अमीर साबरी, तनवीर साबरी, समीर साबरी, अब्दुल्ला साबरी, शब्बीर साबरी ने कोरस किया। साथ ही मतीम एवं आशिफ हुसैन ने ढोलक पर और नईम वारसी ने तबला, जाफर वारसी ने की-बोर्ड और अताउल्लाह हुसैन ने आक्टोपैड पर संगत की। संचालन रहमान हरफनमौला का रहा।