भास्कर शर्मा/ कोटपूतली. आज गांधी जयंती के अवसर पर ड्राई-डे है। शराब की बिक्री पर रोक है। उसके बाद भी शराब खुलेआम बिक रही है। आबकारी विभाग के अधिकारियों ने ठेका संचालकों से मिलीभगत कर शराब बिक्री का ऐसा ‘उचित प्रबंधन’ किया जो लोगों में चर्चा का विषय बना रहा।
दरअसल महात्मा गांधी जयंती के दिन ड्राई डे होता है। अपनी कार्रवाई के तहत आबकारी विभाग शराब के ठेकों को सील करता है। इस बार भी शराब के ठेके सील किए गए। मजे की बात यह है कि शराब बिक्री के लिए शराब के ठेकों के अंदर ही सेल्समैन भी सील कर दिए। जिससे शराब की बिक्री निरंतर जारी है। ड्राई-डे बावजूद अधिक दाम लेकर शराब की बिक्री होती रही।
राजस्थान पत्रिका (न्यूज़ टुडे) टीम ने जब स्टिंग किया तो चौंकाने वाली बात सामने आई की ठेके के बाहर तो सील लगी हुई है, लेकिन भीतर बैठा सेल्समैन शटर के नीचे से शराब की बिक्री कर रहा था।
शराब की दुकानों के बाहर और भीतर मौजूद रहे सेल्समैन
शराब की बिक्री के लिए ठेके के बाहर मौजूद व्यक्ति पहले ग्राहक से बात करता है उसके बाद अंदर बैठे व्यक्ति को शटर के नीचे से इशारा किया जाता और इशारा मिलते ही शराब की बोतल बाहर आ जाती। अवैध रूप से शराब बिक्री के इस खेल में पूरी एहतियात बरती जा रही थी। शराब की दुकानों के बाहर और भीतर सेल्समैन मौजूद रहे।
सील के बावजूद दुकानों के अंदर कैसे पहुंचे सेल्समैन
आबकारी विभाग ने ड्राई डे की कार्रवाई करते हुए सभी ठेकों को बाहर से सील किया था, लेकिन इसके बावजूद ठेके के अंदर अवैध शराब बिक्री के लिए व्यक्ति मौजूद था। अब सवाल ये उठता है कि आखिर ये सेल्स मैन अंदर कैसे पहुंचे? क्या आबकारी विभाग ने ही दुकान सील करते समय इन्हें अंदर छोड़ दिया? सील के बावजूद सेल्समैन का शराब के ठेके के अंदर होना दर्शाता है कि यह आबकारी विभाग की मिलीभगत का खेल है।
कार्रवाई की जाएगी
अभी चेकिंग करवाता हूं, इंस्पेक्टर को भेज रहा हूं, कारवाई की जाएगी।
गिरवर शर्मा, डीईओ आबकारी विभाग, कोटपूतली-बहरोड