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इनके हाथों में हूनर ऐसा, कि जीवंत हो उठती हैं प्रतिमाएं

इनके हाथों में हूनर ऐसा, कि जीवंत हो उठती हैं प्रतिमाएं

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प्रदेश के आदिवासी क्षेत्र डूंगरपुर-बांसवाड़ा के शिल्पकार अपने हुनर से बेजान वस्तु में भी जान डाल देने जैसा काम कर रहे हैं । जनजाति बाहुल बांसवाड़ा जिले के कई कलाकारों ने ना केवल प्रदेश, बल्कि राष्ट्रीय स्तर पर अपने शिल्प का लोहा मनवाया है। इन्हीं में से एक कलाकार हैं तलवाड़ा कस्बे के शिल्पकारी मोहल्ले में रहने वाले नारायण सोमपुरा। नारायण की बनी पाषाण कई प्रतिमाएं महाराष्ट्र, राजस्थान, मध्यप्रदेश, उत्तरप्रदेश, सहित कई राज्यों में लगाई जा चुकी हैं। वहीं कुछ कलाकृतियां विदेश तक भेजी गई हैं। बीते 15 सालों में शिल्पकार नारायण ने 10 से अधिक लोगों को शिल्पकला में पारंगत बनाया है।

सीरे बनाने के हुनर से जुड़े हैं राजेश सोमपुरा

कुनबे-परिवार के दिवंगत सदस्यों की आकर्षक प्रतिमाएं बनाकर उन्हें देव-पितृ के रूप में पूजने की परम्परा प्रदेश में आज भी मौजूद है। हुनरमंद शिल्पकार इन प्रतिमाओं को आज भी अपनी कलाकारी से रूप दे रहे हैं। ऐसे ही शिल्पकार हैं डूंगरपुर के राजेश। डूंगरपुर के शिल्पकार राजेश सोमपुरा,पत्थरों को छैनी हथौड़े से आकर्षक रूप देते हैं। उनकी बनाई मूर्तियां दिवंगत परिजनों की स्मृति में होने वाले विभिन्न धार्मिक कार्यक्रमों में सीरा स्थापना के लिए काम में ली जाती हैं। क्षेत्र के ज्यादातर आदिवासी समाज के लोगों का मानना है कि दिवंगत परिजनों की आत्मा की शांति के लिए अपने खेत-खलिहान पर सीरा बावसी की स्थापना करनी चाहिए। सीरा निर्माण से राजेश को अच्छी आय भी हो जाती है। अब इस कला को जानने वाले चुनिंदा शिल्पी बचे हैं।