जयपुर।
पतंग उड़ाने के लिए मांझे के इस्तेमाल पर रोक के बावजूद हुई पतंगबाजी ने कई परिंदों से उनकी उड़ान का हक छीन लिया है। पांच बत्ती स्थित पॉलीक्लीनिक और विभिन्न स्वयंसेवी संस्थाओं के पास घायल परिंदों का आना शुरू हो गया है। घायल परिंदों में 90 प्रतिशत पक्षियों में मांझे की वजह से गहरे कट लगे हैं इनमें से कई परिंदे तो ऐसे थे जो शायद ही कभी उड़ान भर सकें। पॉलीक्लीनिक के डॉक्टर जितेंद्र राजोरिया ने बताया कि इनमें से कुछ पक्षियों को ऐसी चोटें भी हैं जिसने उड़ान हमेशा के लिए छीन लिया। उनके पंखों में स्थाई इंजरी आई है। इनमें ज्यादातर कबूतर और कमेड़ी शामिल हैं। वहीं, कुछ पक्षियों ने इलाज के दौरान दम भी तोड़ दिया है।
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गौरतलब है कि चाइनीज मांझे पर रोक के बाद भी पतंगबाजी की वजह से घायल पक्षियों की संख्या में गिरावट नहीं आ रही है। इसकी वजह यह है कि पतंगें मांझे के साथ पेड़ों में फंसी रहती हैं, जिसकी वजह से पक्षी घायल होते रहते हैं। पक्षी प्रेमी घायल पक्षियों को अस्पताल और स्वयंसेवी संस्थाओं की ओर से बने हुए शेल्टर होम में पहुंचा रहे हैं। वहीं रक्षा के रोहित गंगवाल ने बताया कि रक्षा शेल्टर मालवीय नगर पर भी मांझे से घायल 15 पक्षी पहुंचे हैं। जिसमें 1 चील का बच्चा, 1 चील , 1 स्पॉटेड ऑवलेट व 12 कबूतर रेस्क्यू किए गए। उनका कहना था कि वाइल्डलाइफ वेट्स इंटरनेशनल के पक्षी विशेषज्ञ डॉक्टर एशले क्लेटन व वेटरनरी नर्स मैथ्यू रैंडल पक्षियों का इलाज करने लंदन से जयपुर आए हैं जो इनका इलाज कर रहे हैं।
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आज से शुरू होगा कैम्प
होप एंड बियोंड संस्था की ओर से बर्ड टीटमेंट कैम्प का आगाज आज से वैशाली नगर में हो रहा है। होप के रक्षा जॉय ने बताया कि कैम्प में मांझे से घायल होने वाले परिदों का इलाज किया जाएगा। परिंदों के ठीक होने के बाद उन्हें आसमान में छोडा जाएगा।