
चाकसू. इलाके में तीन दिनों से हो रही है भारी बारिश के कारण कस्बे की कई कॉलोनियों जलमग्र हो गई हैं। चाकसू विधानसभा क्षेत्र के कई गांव और ढांणिया जल भराव के कारण ताल तलैया बन गए हैं। लोगों को लगातार मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है। वहीं सामान्य जनजीवन प्रभावित हो गया है। गैस एजेंसी के पास टोंक रोड पर लगातार भारी मात्रा में पानी निकल रहा है, जिससे पूरी सडक़ नदी के जैसे लग रही है। लोगों ने प्रशासन से सहायता मांगी है। लोगों का कहना है कि पानी की आवक यदि इसी तरह क्षेत्र में होती रही तो यहां कोई बड़ा हादसा हो सकता है।
तीसरी बार टूटी पाल
मनोहरा तालाब के आडा-भाटा श्मशान के पीछे की पाल लगातार हो रही पानी आवक के चलते गुरुवार रात को तीसरी बार टूट गई, जिससे तालाब के पीछे कृषि मंडी के सामने के पूरे इलाके में जल भराव हो गया है। कच्ची बस्ती से निकल तालाब का पानी कोटखावदा रोड को क्रॉस कर रहा है, जिससे वहां रह रहे लोगों की मुश्किलें लगातार बढ़ गई हैं।
सुरक्षित स्थान पर जाने की अपील
प्रशासन ने इस इलाके में रहने वाले लोगों को सुरक्षित स्थान पर जाने का अनाउंसमेंट किया है। इसके बावजूद भी लोग वहां डटे हैं और अपना आशियाना बचाने की जुगत में लगे हैं।
19 दिन में तीन बार टूटी पाल
मनोहरा तालाब की पाल पिछले 19 दिन में ही तीसरी बार टूट गई। इससे पहले 14 और 28 अगस्त को इसी स्थान से पाल टूट गई थी। जिसे बड़ी मुश्किल से ठीक किया गया था। लेकिन गुरुवार रात को फिर तीसरी बार यह टूट गई। क्षेत्र में तीन दिनों से हो रही लगातार बारिश के चलते तालाब में पानी की आवक तेज हो रही है। श्मशान की ओर से तालाब की दीवार टूटने पर कृषि उपज मंडी के सामने के निचले इलाके जलमग्न हो गए। हालांकि गुरुवार दिन में प्रशासन की ओर से सूरजकुंड इलाके की ओर पाल पर पानी की सुरक्षित निकासी के लिए 2 फीट नीचे पाइप लगाए गए थे, लेकिन प्रशासन का यह प्रयास भी नाकामयाब रहा। वहीं बहुत से लोगों का आरोप है कि तालाब टूटा नहीं गया है तोड़ा गया है।
समाधान की मांग
कच्ची बस्ती एवं कृषि मंडी के सामने की कॉलोनी में बसे लोगों का कहना है कि तालाब अब कस्बे के बीचों-बीच आ चुका है। निचले इलाके में बसे लोगों को हर वर्ष इस समस्या का सामना करना पड़ता है। बारिश के दिनों में रात दिन डर और जागकर गुजारनी पड़ती है। लोगों का कहना है कि समय रहते प्रशासन तालाब में पानी निकासी के लिए चादर, मोरी, छोटी नहर या नाले का निर्माण करता तो ो तालाब के ओवरफ्लो की समस्या नहीं रहती। लोगों ने यहां समस्या के स्थाई समाधान की मांग की है।