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सुनें पॉडकास्टः 77 युद्ध जीतने वाले आमेर नरेश मान सिंह की कहानी

युद्ध के मैदान में बहादुरी दिखा सर्वदा विजयी रहे आमेर नरेश मान सिंह प्रथम की समाधि महाराष्ट्र के इलीचपुर में है। काबुल सहित पूरे हिन्दुस्तान में तलवार चला विजय पताका फहराने वाले दिग्विजयी महाराजा साठ साल की उम्र तक जीवित रहे। मान सिंह ने अंतिम समय तक 77 युद्ध जीते थे। उन्होंने इस्लाम की तलवार को हाथ में रख जहां भी जीत हासिल की वहां पर हिन्दू धर्म के मंदिरों का निर्माण कराने के साथ तीर्थ स्थलों का विकास कराया। मान सिंह की मृत्यु 6 जुलाई 1614 को महाराष्ट्र के एलिचपुर में हुई ।

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युद्ध के मैदान में बहादुरी दिखा सर्वदा विजयी रहे आमेर नरेश मान सिंह प्रथम की समाधि महाराष्ट्र के इलीचपुर में है। काबुल सहित पूरे हिन्दुस्तान में तलवार चला विजय पताका फहराने वाले दिग्विजयी महाराजा साठ साल की उम्र तक जीवित रहे। मान सिंह ने अंतिम समय तक 77 युद्ध जीते थे। उन्होंने इस्लाम की तलवार को हाथ में रख जहां भी जीत हासिल की वहां पर हिन्दू धर्म के मंदिरों का निर्माण कराने के साथ तीर्थ स्थलों का विकास कराया। मान सिंह की मृत्यु 6 जुलाई 1614 को महाराष्ट्र के एलिचपुर में हुई । हिन्दुस्थान में हिन्दू धर्म की पताका फहराने वाले आमेर के इस राजा की इलिचपुर में बनी समाधि के ऊपर शिव मंदिर बना है । मान सिंह के साथ सहवरण करने वाली उनकी दो रानियों की छतरियां मंदिर भी मंदिर की तर्ज पर बनी है जयपुर के अंतिम शासक मानसिंह द्वितीय ने सन 1735 में छत्रियों का जीर्णोद्धार करवाया था। जयपुर में विराजे गोविंद देव जी का वृंदावन में मंदिर और हरिद्वार में हर की पौड़ी पर घाट और गंगा मंदिर मान सिंह प्रथम ने ही बनवाए थे।मुगल सेनापति होते हुए उन्होंने काशी, मथुरा आदि में अनेक हिंदू मंदिर बनवाए। काबुल के मुगल तोप कारखाने जैसा तोप कारखाना जयगढ़ में स्थापित कराया । सैन्य दृष्टि से मुगलों के बाद मानसिंह ने आमेर को सुदृढ़ साम्राज्य बनाया। अकबर के पुत्र जहांगीर को हमेशा यह डर रहा कि मान सिंह कहीं हिंदुस्तान के बादशाह नहीं बन जाए। आमेर नरेश भगवंत दास के आठ पुत्रों में जेष्ठ पुत्र मानसिंह का जन्म 21 दिसंबर 1550 को आमेर के महलों में हुआ। ज्योतिषियों के निर्देश पर मान सिंह को बारह साल तक आमेर के बजाय मोजमाबाद में रखकर सैन्य शिक्षा देने के अलावा हिंदी, संस्कृत और फारसी का अध्ययन करवाया गया। मानसिंह के सभी पुत्रों ने विभिन्न युद्धों में भाग लिया। उनके तीन पुत्र हिम्मत सिंह, दुर्जन सिंह और जगत सिंह की मृत्यु भी दूसरे प्रांतों में हुई। मान सिंह के 26 रानियां, 11 पुत्र और 5 पुत्रियां थी। उनकी पटरानी कनकावती पंवार जी ने अपने पुत्र जगत सिंह की याद में आमेर का एतिहासिक जगत शिरोमणि मंदिर बनवाया।

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