
जयपुर/कोटपूतली. क्षेत्र के बुचारा कंजर्वेशन रिजर्व एरिया में मुख्यालय से लगभग 38 किलोमीटर की दूरी पर बुचारा गांव की पहाडिय़ों में स्थित टपकेश्वर महादेव मंदिर अपने आप में अद्वितीय ऐतिहासिक और धार्मिक महत्व का स्थान है। यह तीर्थ स्थल करीब 500 वर्ष पुराना है। इसे भगवान भोलेनाथ का प्रसिद्ध स्थान माना जाता है। घने जंगल और हरी-भरी पहाडय़िों के बीच स्थित यह शिवालय अपनी प्राकृतिक सुंदरता के लिए प्रसिद्ध है।
यहां बहने वाले भैरव क्यारा के झरने और अनेक सीजनी वॉटरफॉल की धाराएं एक छोटी नदी का रूप लेते हुए मंदिर की सीढिय़ों को स्पर्श करती हैं। बरसाती नदी को पार कर भक्तों को लगभग 150 सीढि़य़ां चढऩी पड़ती है। मंदिर के समीप एक पेड़ के नीचे प्राकृतिक जल का स्रोत है, जिससे बारहों महीने जल रिसता रहता है। इसी कारण इस स्थल का नाम ‘टपकेश्वर महादेव’ पड़ा। इसी जल से शिवलिंग का अभिषेक किया जाता है और यह स्रोत तीर्थयात्रियों के लिए पीने के पानी का मुख्य साधन है।
भजनदास महाराज की तपोस्थली
ऐतिहासिक मान्यताओं के अनुसार यह स्थान प्रसिद्ध संत भजनदास महाराज की तपोस्थली रहा है। तत्कालीन शाहपुरा रियासत द्वारा यहां महाराज भजनदास जी की छतरी, शिवालय, और एक छोटे महल नुमा विश्राम स्थल का निर्माण करवाया गया था जो आज भी इस क्षेत्र की समृद्ध विरासत को संजोए हुए है। समय के साथ विभिन्न श्रद्धालुओं ने भी छोटे बड़े निर्माण बाद में करवाए हैं जो यहां रुकने वाले साधू -सन्यासियों,तीर्थ यात्रियों के काम आते हैं।
श्रावण मास के दौरान इस पवित्र स्थल पर भक्तों की विशेष भीड़ होती है। यहां प्रतिदिन विशेष पूजा-अनुष्ठान और सवामनी का आयोजन किया जाता है। इसके अलावा पर्यटकों के लिए भी यह स्थल एक आकर्षक स्थान है जहां वे प्राकृतिक झरनों का आनंद ले सकते हैं।
बुचारा कंजर्वेशन रिजर्व एरिया में स्थित टपकेश्वर महादेव मंदिर न केवल एक धार्मिक स्थल है बल्कि यह प्रकृति प्रेमियों के लिए भी एक अद्भुत स्थल है, जहां श्रद्धालु और पर्यटक एक साथ अध्यात्म और प्रकृति का आनंद ले सकते हैं।