जयपुर. विकसित देशों में जब सिनेमा आया तो वहां के लोग उस सोच से आगे विकसित हो चुके थे लेकिन हिंदुस्तान में सिनेमा उस समय आया जब यहां के लोग गरीबी, भुखमरी, अशिक्षा समेत अन्य समस्याओं से गुजर रहे थे। विकसित देशों में अच्छी चीजें पहले समाज में आई फिर फिल्मों में और हिन्दुस्तान में वही चीजें पहले सिनेमा में आई फिर समाज में आई। यह बातें फिल्म समीक्षक अजीत राय ने गुलाबीनगरी में कही। दरअसल, वह शनिवार को झालाना स्थित ऑफिसर्स क्लब में आयोजित ‘राजनीति और वल्र्ड सिनेमा’ विषय पर हुए टॉक शो में शामिल हुए थे। उन्होंने कहा कि एफटीआई और एनएसडी जैसे संस्थान हर स्टेट में होने चाहिए ताकि युवा आगे बढ़ सके।
फिल्मकार दिखा रहे है ‘सच्चाई’
उन्होंने विश्व स्तर की फिल्मों पर बात करते हुए कहा कि आज का वल्र्ड सिनेमा मनुष्य की आजादी का घोषणा पत्र है। जिससे खतरा नजर आता है सिनेमा उसके खिलाफ खड़ा है, चाहे वह धर्म, शासन, समाज ही क्यूं न हो। उन्होंने कहा कि सिनेमा अकेला ऐसा कॉर्प है जो दुनिया के लिए किसी को सबसे ज्यादा पॉवरफुल तरीके से एड्रैस करता है। जहां आपकी निगाह नहीं जाती, फिल्ममेकर्स उसी सच्चाई पर आपका ध्यान ले जा रहे हंै। जहां पॉलिटिक्स उन्हें छुपा रही है।

कई फिल्में कर रही पॉलिटिक्स डिसाइड
राय ने कहा कि वल्र्ड में जो भी बड़ी फिल्में बनी, वो बिना पॉलिटिक्स के बन ही नहीं सकती थी। कोई सा भी क्षेत्र हो राजनीति असर डालती ही हैं। आज कई ऐसी फिल्में बन रही है जो पॉलिटिक्स को डिसाइड कर रही है। सेकेंड वल्र्ड वॉर पर करीब 1200 फिल्म बन चुकी है। यूरोप अभी भी इस से उभर नहीं पाया। मैंने फिल्म में देखा कि धर्म परिवर्तन हिन्दू, मुस्लिम, क्रिश्चन का ही मुद्दा नहीं है ये तो इटली में 1600 से चला आ रहा है। कई देशों में ऐसी फिल्में बनती है अगर वो फिल्में हमारे देश में बन जाए तो राजद्रोह का केस लग जाए।