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बिगड़ा लिंगानुपात बना मुसीबत

...'जरूरी नहीं रोशनी चिरागों से ही हो, शिक्षा से भी घर रोशन होते हैं।' प्रतापगढ़ के छोटी सादड़ी कस्बे में कुछ ऐसा ही जज्बा उस वक्त देखने को मिला जब एक छात्रा ने कोर्ट में अर्जी दायर कर गुहार लगाई कि उसे अभी पढ़ना है, ससुराल नहीं जाना...। जज ने भी तुरंत संज्ञान लेकर छात्रा के माता-पिता को तलब किया और उसकी पढ़ाई में व्यवधान नहीं डालने को पाबंद किया

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प्रतापगढ़ के रेवड़ा महादेव गांव की 17 वर्षीय टीना मीणा। हरीश आंजना बालिका उच्च माध्यमिक विद्यालय की 11वीं कक्षा की ये छात्रा शारदे छात्रावास में रहकर अपनी पढ़ाई पूरी कर रही है। कल दोपहर एकाएक वह वकील प्रकाशचंद साहू के साथ अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट देवेंद्र सिंह पंवार के कोर्ट में पेश हुई। गुहार लगाई कि वह अभी ससुराल नहीं जाना चाहती, पढ़ना चाहती है। लेकिन ससुराल वाले, उसके मम्मी-पापा पर भेजने के लिए दबाव बना रहे हैं। प्रताड़ित कर रहे हैं, लेकिन वह अभी पढ़ना चाहती है, जीवन आगे बढ़ना चाहती है।
{वीओ-3}…. पिता वजेराम ने बताया कि ससुराल वाले पिछले 2 साल से टीना को भेजने के लिए दबाव बना रहे हैं। उनको मानसिक रूप से परेशान भी कर रहे हैं। दोनों भाई-बहन की आटे साटे शादी हुई थी। शादी के समय टीना के ससुराल वालों ने कहा था कि बच्ची जब तक चाहे पढ़ाई करे। उसको पढ़ाना, हम ससुराल नहीं ले जाएंगे। लेकिन अब ससुराल वाले इस बात से मुकर रहे हैं। बहरहाल, टीना को तो राहत मिल गई, लेकिन उसकी जैसी कई टीना हैं जो समाज और परिवार के डर के चलते अपनी आवाज उठा नहीं पाती है। उन्हें भी हिम्मत दिखानी होगी और तभी वे पढ़ सकेंगी और आगे बढ़ सकेंगी। क्योंकि किसी ने सही ही कहा है…खुदी को कर बुलंद इतना कि हर तकदीर से पहले खुदा बंदे से खुद पूछे बता तेरी रज़ा क्या है

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