ऑपरेटर की नियुक्ति और तकनीकी स्वीकृति के अभाव में ये मशीनें आज तक चालू नहीं हो सकीं। कई स्थानों पर उपकरणों का परीक्षण नहीं किया गया, जबकि कुछ मंडियों में मशीनों के रखरखाव की गाइडलाइन ही तय नहीं हो पाई। प्रदेश की सीकर, बूंदी, झुंझुनूं, नागौर और पाली सहित कई मंडियों में मशीनें या तो बंद पड़ी हैं या लंबे समय से मरम्मत का इंतजार कर रही हैं। कुछ जगह स्टाफ के अभाव में मशीनें शुरू ही नहीं हो सकीं। बाजार विशेषज्ञों के अनुसार ग्रेडिंग के बाद चना, सरसों और गेहूं जैसी फसलों के दाम 10 से 20 प्रतिशत तक बढ़ सकते हैं।