भारत के रॉकेट मिशन को नई ऊंचाइयों पर पहुंचाने में अहम योगदान देने वाली वैज्ञानिक वीआर ललिथाम्बिका को भारत के ‘गगनयान’ अभियान की जिम्मेदारी सौंपी गई है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 72वें स्वतंत्रता दिवस के मौके पर लाल किले की प्राचीर से घोषणा की है कि 2022 तक भारत का कोई बेटा या बेटी तिरंगा लेकर अंतरिक्ष में जाएगा। इस अभियान में 10,000 करोड़ रुपए की लागत आने की बात कही जा रही है। भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) के चेयरमैन के सिवान ने इस अभियान की जिम्मेदारी लॉन्च वेहिकल टेक्नॉलजी में एस्ट्रोनॉटिकल सोशायटी एक्सीलेंस अवॉर्ड जीत चुकीं ललिताम्बिका को सौंपी है।गगनयान मिशन ‘चुनौतीपूर्ण’ लेकिन हम इसे हासिल कर लेंगे : इसरो प्रमुख बता दें कि ललिताम्बिका ऑटोपायलट रॉकेट्स के निर्माण पर काम कर चुकी हैं। वह जियोसिंक्रोनस सैटेलाइट लॉन्च वेहिकल (वीएसएल-एमके-3) सहित रॉकेट्स के डिजायन की समीक्षा करने वाली टीम की अगुवाई करेंगी। यह रॉकेट ही भारत के मानवयुक्त मिशन को अंतरिक्ष में ले जाएगा। ललिताम्बिका इसके पहले तिरूवनंतपुरम स्थित विक्रम साराभाई अंतरिक्ष केंद्र (वीएसएससी) में बतौर उप निदेशक के रूप में भी कार्य कर चुकी हैं जबकि के सिवान वीएसएससी के निदेशक रह चुके हैं।इसरो ने 2004 में जब पहली बार मानवयुक्त अंतरिक्ष मिशन की योजना तैयारी की, तभी से अंतरिक्ष एजेंसी इस मिशन के लिए जरूरी तकनीकी का विकास कर रही है। इस मिशन की सबसे अहम कड़ी क्रिउ मॉड्यूल (कैप्सूल) का निर्माण है जो कि मानव को अंतरिक्ष में ले जाएगा। अंतरिक्ष एजेंसी इस कैप्सूल के प्रोटोटाइप का सफलतापूर्वक परीक्षण पहले ही कर चुकी है।गौरतलब है कि ललिताम्बिका एडवांस्ड लॉन्चर टेक्नोलजी की विशेषज्ञ हैं। ललिताम्बिका 1988 में वीएससीसी में शामिल हुई थीं। वह इस केंद्र में कंट्रोल, गाइडेंस और साइमुलेशमन रिसर्च वर्क की प्रभारी रही हैं। साधारण शब्दों में कहें तो रॉकेट को उड़ाने की जिम्मेदारी इनके कंधों पर होती है। ललिताम्बिका ईंधन प्रणाली, ऑटोपायलट प्रणाली, रॉकेट कम्प्यूटर्स एवं हार्डवेयर की डिजायन करने वाली टीम की अगुवाई करती हैं।