जयपुर। पर्यावरण और लोगों के लिए सिरदर्द बना प्लास्टिक, इलेक्ट्रॉनिक, कंडम वाहन, बैटरी सहित अन्य वेस्ट अब ‘वेस्ट’ नहीं होगा। ऐसे सभी वेस्ट को न केवल एक ही जगह उपयोगी बनाया जाएगा, बल्कि लोगों को इस कचरे का भी सही दाम मिलेंगे। इसके लिए जयपुर के थोलाई में इंटीग्रेटेड रिसोर्स रिकवरी पार्क प्रोजेक्ट आ रहा है। इसमें वही यूनिट (उद्योग) आएगी, जो वेस्ट को रिसाइकिल करेगी। यानि, वेस्ट रिसाइकिल का अलग औद्योगिक जोन बनेगा। खास यह है कि रिसाइकिल वेस्ट ही वहां दूसरे उद्योगाें के काम भी आएगा। इसके लिए ऐसी मेन्यूफ्रेक्चरिंग यूनिट लगाने के लिए भी होमवर्क किया जा रहा है, जहां रिसाइकिल वेस्ट का उपयोग हो सके। राजस्थान में पहली बार इस तरह का वेस्ट रिसाइकिल पार्क डवलप किया जा रहा है। इस क्षेत्र में अध्ययन कर रहे युवाओं के लिए यह एजुकेशन सेंटर भी होगा। अभी अकेले जयपुर में ही सालाना 13 लाख टन से ज्यादा यह कचरा निकल रहा है, लेकिन साइंटिफिक तरीके से निस्तारण 30 प्रतिशत का ही हो पा रहा है। रीको, प्रदूषण नियंत्रण मण्डल और पर्यावरण और जलवायु परिवर्तन विभाग मिलकर काम कर रहे हैं।
हर साल निकल रहा वेस्ट
-6.43 लाख टन खतरनाक अपशिष्ट
-2.11 लाख टन ई-वेस्ट
-72 हजार टन प्लास्टिक वेस्ट
-87 हजार टन बैटरी वेस्ट
100 यूनिट का ब्लू प्रिंट
रीको ने यहां सौ यूनिट लगाने का प्लान तैयार किया है। 48 हेक्टेयर जमीन पर सृजित प्रोजेक्ट में एक हजार से 10 हजार वर्गमीटर तक के भूखंड होंगे। इसमें छोटे स्तर पर रिसाइकिल यूनिट शुरू करने वालों पर भी फोकस रहेगा, क्योंकि सबसे ज्यादा 54 भूखंड एक हजार वर्गमीटर के ही हैं। रीकाे यहां 50 करोड़ की लागत से इन्फ्रास्ट्रक्चर विकसित कर रहा है।
इनकी होगी रिसाइकलिंग
-कंडम होने वाले वाहन
-इलेक्ट्रॉनिक वेस्ट
-प्लास्टिक वेस्ट
-खतरनाक अपशिष्ट
-ली-आयन बैटरी
-बैटरी वेस्ट
-वेस्ट टू एनर्जी
इन्हें रखा गया है दूर
-बायोमेडिकल वेस्ट
-नगरीय निकायों का सॉलिड वेस्ट
-लेदर अपशिष्ट
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टाॅपिक एक्सपर्ट : वी.के. सिंघल, पूर्व चीफ इंजीनियर, प्रदूषण नियंत्रण मण्डल
-यह वेस्ट हमारे स्वास्थ्य के साथ नदी, नालों, भूजल के बड़े स्त्रोतों को भी प्रदूषित कर रहा है। मिट्टी की गुणवत्ता खराब हो रही है। सभी तरह के वेस्ट को पूरी तरह रिसाइकिल करके उसे फिर से उपयोगी बनाना जरूरी हो गया है। इंटीग्रेटेड रिसोर्स रिकवरी पार्क इसके लिए मील का पत्थर साबित होगा। न केवल ऐसे उद्योग एक जगह आएंगे, बल्कि ज्यादातर रिसाइकिल वेस्ट उन्हीं उद्योगों के उपयोग में भी आ सकेगा। जो युवा इस क्षेत्र में अध्ययन कर रहे हैं, उनके लिए एजुकेशन का भी हब बनेगा। दूसरे राज्यों के लिए भी यह मॉडल के रूप में सामने आएगा।