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प्रदेश के जल संकट की गूंज दिल्ली तक, केंद्र सरकार से की हिस्सेदारी बढ़ाने की मांग
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प्रदेश के जल संकट की गूंज दिल्ली तक, केंद्र सरकार से की हिस्सेदारी बढ़ाने की मांग

राजस्थान में जल संकट की गूंज दिल्ली में भी हुई। नई दिल्ली के विज्ञान भवन में राज्यों के जल संसाधन मंत्रियों की बैठक में प्रदेश के जलदाय मंत्री डॉ. बी.डी कल्ला ने राजस्थान में जल उपलब्धता की विषम परिस्थितियों का जिक्र किया। उन्होने मांग की कि केंद्र सरकार पेयजल के लिए राजस्थान को प्राथमिकता से केंद्रीय सहायता उपलब्ध कराए। डॉ. कल्ला ने विभिन्न जलदाय योजनाओं में केंद्रीय हिस्सेदारी भी बढ़ाने की मांग की। बैठक की अध्यक्षता केंद्र जल शक्ति मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने की। डॉ. कल्ला ने राजस्थान में जल संकट का जिक्र करते हुए बताया कि राज्य में प्रति व्यक्ति प्रतिवर्ष पानी की उपलब्धता 640 घन मीटर ही है, जबकि देश में यह 1700 घनमीटर और विश्व में 2000 घनमीटर है। उनका कहना था कि राज्य सरकार के वित्तीय संसाधन सीमित हैं। ऐसे में खास तौर से मरुस्थलीय जिलों में केंद्र सरकार को पेयजल योजनाओं में सौ फीसदी भागीदारी करनी चाहिए। मंत्री ने बताया कि खारेपन से प्रभावित देश की कुल ढाणियों और गांवों में से 92 फीसदी तो अकेले राजस्थान में है। इसके मद्देनजर राष्ट्रीय पेयजल ग्रामीण कार्यक्रम के तहत आर. ओ. प्लांट लगाने की वितीय स्वीकृति दी जानी चाहिए।
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Ajeet Singh Parmar

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Updated: 11 Jun 2019, 8:38 PM IST

राजस्थान में जल संकट की गूंज दिल्ली में भी हुई। नई दिल्ली के विज्ञान भवन में राज्यों के जल संसाधन मंत्रियों की बैठक में प्रदेश के जलदाय मंत्री डॉ. बी.डी कल्ला ने राजस्थान में जल उपलब्धता की विषम परिस्थितियों का जिक्र किया। उन्होने मांग की कि केंद्र सरकार पेयजल के लिए राजस्थान को प्राथमिकता से केंद्रीय सहायता उपलब्ध कराए। डॉ. कल्ला ने विभिन्न जलदाय योजनाओं में केंद्रीय हिस्सेदारी भी बढ़ाने की मांग की। बैठक की अध्यक्षता केंद्र जल शक्ति मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने की। डॉ. कल्ला ने राजस्थान में जल संकट का जिक्र करते हुए बताया कि राज्य में प्रति व्यक्ति प्रतिवर्ष पानी की उपलब्धता 640 घन मीटर ही है, जबकि देश में यह 1700 घनमीटर और विश्व में 2000 घनमीटर है। उनका कहना था कि राज्य सरकार के वित्तीय संसाधन सीमित हैं। ऐसे में खास तौर से मरुस्थलीय जिलों में केंद्र सरकार को पेयजल योजनाओं में सौ फीसदी भागीदारी करनी चाहिए। मंत्री ने बताया कि खारेपन से प्रभावित देश की कुल ढाणियों और गांवों में से 92 फीसदी तो अकेले राजस्थान में है। इसके मद्देनजर राष्ट्रीय पेयजल ग्रामीण कार्यक्रम के तहत आर. ओ. प्लांट लगाने की वितीय स्वीकृति दी जानी चाहिए।

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