जयपुर। कोश किसी भी भाषा और उसके साहित्य की संपन्नता, समृदिध और शक्ति के परिचायक होते हैं। आज तेजी से बदलते विश्व में हिंदी मात्र विभिन्न साहित्यिक विधाओं की भाषिक अभिव्यक्ति का ही माध्यम नहीं रह गई है, बल्कि आज वह ज्ञान—विज्ञान, प्रौद्योगिकी, जनसंचार, अर्थशास्त्र, वाणिज्य, मनोरंजन, विज्ञापन का भी माध्यम बनती जा रही है। जानकारों की मानें तो समृदृध भाषाओं की तुलना में हिंदी में अभी तक विश्वस्तरीय कोश परंपरा संतोष जनक नहीं है। ऐसे में एक नया हिंदी का कोश बनाने की जरूरत महसूस हुई।
पिछले करीब 5 दशकों में हिंदी में विभिन्न विदृया शाखाओं और अनुशासनों की शब्दावली में जिस गुणात्मक रूप से वृदिध हुई है, उसकी पूर्ति की दृष्टि से ये कोश पुराने पड़ने लगे। इसी के चलते अब केन्द्रीय हिंदी निदेशालय ने बृहत् हिंदी कोश बनाया है। प्रदेश में इसके प्रचार—प्रसार की जिम्मेदारी भाषा एवं पुस्तकालय विभाग की रहेगी। जानकारी के अनुसार सुराज संकल्प में भी हिंदी का विश्वस्तरीय शब्दकोष बनाने की बात कही गई थी। इससे विद्यार्थियों को स्वयं की मातृभाषा में ज्ञान सामग्री भी उपलब्ध हो सकेगी।
इस हिंदी कोश में प्रत्येक शब्द का रूप, संज्ञा, विशेषण, विलोम और प्रयोग के लिए उदाहरण इसमें शामिल किए गए हैं। इसमें विज्ञान, चिकित्सा, तकनीकी, कृषि विज्ञान व अन्य सभी प्रचलित विषय शामिल किए गए हैं। ऐसे बना बृहत हिंदी कोश अब केन्द्रीय हिंदी निदेशालय ने आज की हिंदी की इसी महत्वपूर्ण आवश्यकता को पूरा करने के लिए बृहत् हिंदी कोश परियोजना पर कार्य शुरू किया।
प्रदेश में इसके प्रचार—प्रसार की जिम्मेदारी भाषा पुस्तकालय विभाग को दी गई। इस कोश में हिंदी की पारंपरिक प्राणवान शब्दावली को तो समाविष्ट किया ही गया, साथ ही पांच—छह दशकों में विभिन्न नवनिर्मित हिंदी शब्दों को भी इसमें शामिल किया गया है। ये वे शब्द हैं जो अब विभिन्न विश्वविद्यालयों की पाठयपुस्तकों, शोधपत्रों, समाचार पत्रों में प्रचुरता के साथ काम में आ रहे हैं। ढाई लाख से अधिक शब्द बृहत् हिंदी कोश में करीब ढाई लाख से अधिक शब्द हैं। इसके दो खण्ड तैयार किए गए हैं। जिसमें पहले खण्ड में 1349 पेज हैं और दूसरे खण्ड में 1541 पेज हैं। दोनों खण्डों में 2890 पेज हैं। पहले खण्ड में अ से न तक और दूसरे खण्ड में प से ज्ञ तक के शब्द हैं।
कोश बनकर तैयार
बृहत् हिंदी कोश बनकर तैयार हो गया है। इसे बनाने में कई साल लगे। हिंदी दिवस पर इसे आमजन के लिए जारी किया जाएगा। इसमें करीब ढाई लाख से अधिक शब्द हैं।
अशफाक हुसैन, विशिष्ट शासन सचिव, भाषा एवं पुस्तकालय विभाग