23 जनवरी 2026,

शुक्रवार

Patrika LogoSwitch to English
icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

झालावाड़

जिले में 504 प्रेरक बेरोजगार,पीईईओ संभालेंगे अब

-वेतन के 98 लाख रूपए वेतन के बकाया - साक्षरता एवं सतत शिक्षा अभियान का नाम बदला, अब 'पढ़ो-लिखो अभियानÓ के नाम से चलेगा - जिले में 1 लाख 38 हजार लोगों को साक्षर करने का लक्ष्य

Google source verification



हरि सिंह गुर्जर/ झालावाड़.केन्द्र सरकार एक तरफ तो करोड़ों युवाओं को रोजगार देने की बात कर रही है। वहीं दूसरी ओर एक दशक से अधिक समय से स्थायी रोजगार की आस में न्यूनतम मानदेय पर काम कर रहे प्रेरकों को केन्द्र सरकार ने बेरोजगार कर दिया है। इतना ही नहीं प्रेरकों का करीब 5 से लेकर 39 माह तक की पगार बकाया है। ऐसे में इन छोटे कर्मचारियों को आर्थिक परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। केन्द्र सरकार ने साक्षरता एवं सतत् शिक्षा अभियान का नाम बदल कर अब ‘पढ़ो-लिखो अभियानÓ कर दिया है।

अब पीईईओ संभालेंगे कमान-
जिले में चल रहे साक्षरता एवं सतत् शिक्षा केन्द्रों की कमान प्रेरकों के स्थान पर जिले के सभी 252 ग्राम पंचायतों के प्रेरक कमान संभालेंगे। अब ग्राम पंचायतों में चलने वाले पुस्तकालय व वाचनालयों के सभी सामान संबंधित पीईईओं के ऑफिस में शिफ्ट किया जाएगा, ताकि इस अभियान की अच्छे से मॉनिटरिंग की जा सके। इस योजना के पांच साल पूरे होने पर अभियान का नाम बदलकर सरकार ने अब पढ़ो-लिखों अभियान कर दिया है। इस योजना में केन्द्र सरकार का 70 व राज्य सरकार का 30 फीसदी सहयोग रहता है।इस अभियान के माध्यम से ग्रामीण क्षेत्र के निरक्षर लोगों को साक्षर कर परीक्षा दिलवाना अभियान का मुख्य उद्देश्य रहता है।


इतने लोगों को करना होगा साक्षर-
ब्लॉक इतने करने साक्षर करने
झालरापाटन 26000
मनोहरथाना 30500
बकानी 21500
खानपुर 18500
डग 23000
पिड़ावा 19000
कुल 138500

जिले की साक्षरता दर अभी पुरूषों की 84 व महिलाओं की 71 फीसदी है। जिले में दोनों की साक्षरता दर बढ़ाने पर अभियान का मुख्य फोकस रहेगा।

 

98 लाख रूपए वेतन के बकाया-
जिले में एक दशक से अधिक समय से काम करे प्रेरकों को सरकार ने बंद कर दिया है। ऐसे में प्रेत्येक ग्राम पंचायत पर लगे एक महिला एक पुरूष सहित करीब 504 प्रेरको का किसी का 8 माह से लेकर किसी का 39 माह तक का भुगतान बकाया चल रहा है। इन साक्षरता प्रेरकों को 2 हजार रूपए केन्द्र सरकार से व 5 सौ रूपए राज्य सरकार से पुस्तकालय व वाचनालय के नाम पर दिए जाते है, लेकिन इन कर्मचारियों को बंद भी कर दिया है,ऐसे में इन्हें आर्थिक तंगी का सामना करना पड़ रहा है। जिले में प्रेरकों का करीब 98 लाख रूपए वेतन बकाया चल रहा है।

इसलिए अटका-
जिले में कार्यरत सभी प्रेरक ग्राम पंचायत के अधीन कार्य करते हैं, ऐसे में कहीं सचिव बदलने के चलते हस्ताक्षर नहीं हो पाए है। सरपंच व सचिव के हस्ताक्षर जयुपर मुख्यालय में सांगानेर स्थित एसबीआई की शाखा में बदले जाते हैं,ऐसे में कई हस्ताक्षर नहीं बदलने के चलते इन प्रेरकों का वेतन नहीं बन पाया है, तो कई का वेतन आने के बाद भी नहीं निकाल पाने से विभाग ने वापस निकाल कर दूसरे जिलों में डाल दिया है।

आर्थिक का कर रहे सामाना-
हम 2004 से मात्र 2500 रूपए प्रतिमाह में इस आशा के साथ काम कर रहे थे, की कभी तो सरकार हमें स्थायी करेगी, लेकिन अब तो सरकार ने हटा ही दिए है। जबकि दोनो सरकारों ने प्रेरकों को स्थायी करने के लिए कहा था। हटाने से अब जिलेभर के करीब 504 प्रेरकों को बेराजगारी की मार झेलने पड़ रही है। हमारी सरकार से एक ही मांग है कि पीईईओ ऑफिस में हमें ही फिर से काम दे दिया जाएं, ताकि हमें घर चलाने में परेशानी नहीं आए।अभी भी कई लोगों का भुगतान चार-चार साल का बकाया चल रहा है।

दिनेश सुमन, जिलाध्यक्ष महात्मागांधी पुस्तकालय एवं वाचनालय शिक्षा कर्मी प्रेरक संघ,झालावाड़।

-भारत सरकार ने सतत् शिक्षा अभियान का नाम बदल कर पढ़ो-लिखो अभियान कर दिया है। इसकी जिम्मेदारी अब जिले के सभी पीईईओ को दी गई। इससे अब इसकी मॉनिटरिंग अच्छे से हो पाएगी। प्रेरकों को हटाने का निर्णय सरकार के स्तर का है,भुगतान जैसे-जैसे बजट आ रहा है विभाग द्वारा किया जा रहा है।
डॉ. हेमन्त शर्मा, सहायक निदेशक, माध्यमि शिक्षा अभियान,झालावाड़।