झालावाड़ जिले में अवैध खननकर्ताओं के हौंसलें बुलन्द है। जिले की सैकड़ों की बीघा वनभूमि अवैध खनन की भेंट चढ़ चुकी है। अब चरागाह भूमि पर भी खननकर्ताओं ने कब्जा कर लिया है। हाल ही में झालरपाटन पंचायत समिति की ग्राम पंचायत कनवाडा में 70 बीघा से ज्यादा चरागाह की भूमि को खननकर्ताओं ने खदान में तब्दील कर दिया हैं। स्थानीय सरपंच ने जिला कलक्टर, खान विभाग, तहसीलदार को शिकायत की , लेकिन अब तक कार्रवाई नहीं हुई।
इस पंचायत करीब 70 बीघा से ज्यादा चरागाह भूमि पर कोटा स्टोन की खदानें चल रही है।ल। जिस भूमि पर घास का मैदान था और पशु चरते थे, वहां अब मलबे के पहाड़ नजर आ रहेे हैं। पंचायत की साढे चौदह हैक्टेयर चरागाह भूमि पर अवैध खनन कर कोटा स्टोन निकाला जा रहा है। इसी के निकट गांव झीझनी के खसरा नंबर दो व 13 चरागाह है। यहां भी खनन के बाद अब मलबे के ढेर लगे हैं। इनमें से कई खननकर्ता अपनी निर्धारित लीज सीमा के आगे बेरोकटोक खनन कर रहे हैं। नतीजतन अब पशु चारे के लिए खेतों में मारे-मारे फिर रहे हैं। कनवाड़ा ग्राम पंचायत की खसरा नंबर 2 और 4 के अलावा 70, 163, 172 खसरा नंबर जमीन भी चरागाह है। जो खुर्द खुर्द हो चुकी है। यह कुल करीब 75 हेक्टेयर भूमि है।
इनके खनन की कोई सीमा नहीं
निर्धारित लीज सीमा से बाहर जाकर खनन करना या अन्य सरकारी जमीन पर खनन करना नियम विरूद्ध है। इतना ही नहीं चरागाह की जमीन को लेकर राजस्थान उच्च न्यायालय के स्पष्ट निर्देश हैं कि इस श्रेणी की भूमि को किसी भी अन्य उपयोग में नहीं दिया जा सकता, लेकिन यहां चरागाह भूमि से कोटा स्टोन निकाल कर मोटा मुनाफा कमाया जा रहा है।
सीमाज्ञान तक नहीं किया
सरपंच की शिकायत के बाद भी किसी भी जिम्मेदार विभाग ने कोई कार्रवाई नहीं की। राजस्व विभाग ने भी चरागाह के संरक्षण के लिए कोई प्रयास नहीं किए। चरागाह भूमि के संरक्षण का जिम्मा राजस्व विभाग और ग्राम पंचायतों का है। ग्राम पंचायत की ओर से कई शिकायत जिला प्रशासन और खनन विभाग को की जा चुकी है, लेकिन राजस्व विभाग ने इसका सीमाज्ञान तक नहीं किया।
पुलिस अधीक्षक को दिया परिवाद
सरकारी भूमि पर कब्जा करना, वहां बिना सक्षम विभाग की स्वीकृति के मिट्टी-पत्थर चुराना भारतीय दंड संहित की धारा 379 व आवंटित क्षेत्र के तहत अपराध है। साथ ही निर्धारित लीज सीमा से अलग अन्य स्थान पर खनन करना भारतीय दंड संहिता की 420 के तहत अपराध है। इस मामले में सामाजिक कार्यकर्ताओं ने जिला पुलिस अधीक्षक को गत 23 मई को परिवाद देकर कार्रवाई की मांग की, लेकिन पुलिस ने भी कोई कार्रवाई नहीं की।
नाले को भी नहीं छोड़ा
कनवाड़ा पंचायत में जिस चरागाह भूमि पर अवैध खनन हो रहा है, वहां पास में एक बड़ा नाला भी है, जिसे भी अवैध खनन के बाद मलबे से भर दिया है। इस नाले के ऊपर एक एनिकट भी बना है। लेकिन एनिकट के पूरे क्षेत्र में मलबा होने से वहां पानी नहीं भरता।
यह बोले जिम्मेदार….
प्रशासनिक टीम ने 22 जून को 11 बजे का समय दिया था। हम श्रमिक लेकर बैठे रहे। वे तीन बजे आए और मोबाइल में ही दिखाकर हस्ताक्षर करवाना चाहते थे। हमने मना कर दिया। बोल रहे थे कि टीले में है चारागाह की भूमि। हमने कहा कि हमें तो प्वाइंट बता दो कि किस जगह से ग्राम पंचायत की भूमि है। वहां से हम चारदीवारी करवा कर पौधरोपण करेंगे।
चन्द्रभानसिंह झाला, सरपंच कनवाड़ा
-इस मामल में राजस्व विभाग की टीम जमीन की पैमाइश कर रही। शीघ्र ही रिपोर्ट जिला कलेक्टर को सौंप दी जाएगी।
गजेन्द्र शर्मा, तहसीलदार, झालरापाटन
राजस्व विभाग के साथ टीम बनी हुई है, जिसमें तहसीलदार आदि शामिल है। सर्वे करीब पूरा हो चुका है। एक-दो दिन में रिपोर्ट आ जाएगी। उसके बाद कार्रवाई करेंगे।
प्रभूलाल संवारिया,एमई, खनन विभाग, झालावाड़
सभी जगह चारागाह भूमि पर अतिक्रमण व खनन नहीं है। एक लीज के पास का मामला है। उसकी रिटर्न रिपोर्ट आ चुकी है, खनन विभाग के साथ जब मीटिंग होगी तो उस पर कार्रवाई करेंगे।
आलोक रंजन, जिला कलक्टर, झालावाड़
एक्सपर्ट व्यू
प्रशासन की हो सख्त मॉनिटरिंग
झालावाड़ शहर के आसपास जो पहाड़ के पहाड़ नजर आ रहे हैं। उसका समाधान हो सकता है, अगर खनन विभाग, राजस्व विभाग व जिला प्रशासन चाहे तो। कोई भी खान काटने के बाद उसका मलबा उसी में डालकर उसे भरने का नियम है लेकिन जिले में ऐसा नहीं हो रहा है। अगर ऐसा हो तो उस जमीन पर पौधरोपण किया जा सकता है। जिले में कई स्थानों पर चारागाह भूमि पर खनन किया जा रहा है। कई जगह लीज क्षेत्र के बाहर खनन हो रहा है। खनन विभाग लीज संभलाकर फ्री हो जाता है। फिर कोई देखने व मॉनिटरिंग करने वाला नहीं होता है। राजस्व विभाग को भी देखना चाहिए कि उनकी जमीन पर कहां-कहां अतिक्रमण व खनन हो रहा है। खनन विभाग को पूरा सीमा ज्ञान करवाकर वहां बोर्ड लगवाना चाहिए। इसमें एनजीटी को भी हस्तक्षेप कर पर्यावरण को हो रहे नुकसान से बचना चाहिए।
राजेन्द शर्मा, अध्यक्ष चन्दावती ग्रोथ सेंटर एसोसिएशन, झालरापाटन