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आंख के पर्दे की जांच अब जनाना में होगी नि:शुल्क
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आंख के पर्दे की जांच अब जनाना में होगी नि:शुल्क

  - 40 लाख रुपए की लागत की ओसीटी मशीन हुई इंस्टॉल- नहीं जाना पड़ेगा निजी अस्पतालों में।

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झालावाड़.आंख की बीमारी कालापानी(ग्लूकोमा) पीडि़त मरीजों के लिए अच्छी खबर है। अब उन्हें इलाज के लिए ज्यादा पैसे खर्च नहीं करने पड़ेंगे। हीरा कुंवर बा जनाना चिकित्सालय में ही मरीज इसकी जांच करवा सकेंगे। अस्पताल के नेत्र रोग विभाग में 40 लाख की लागत से आप्टिकल कोहेरेंस टोमोग्राफी (ओसीटी) जांच मशीन स्टॉल कर दी गई है। इससे झालावाड़ सहित मध्यप्रदेश के काफी मरीजों को फायदा होगा। नेत्ररोग विभागाध्यक्ष डॉ.एमएल गुप्ता ने बताया कि मशीन को इंस्टाल किए एक सप्ताह हो गया है। इस मशीन से मरीजों के पर्दे आदि की जांच आसनी से हो सकेगी। इससे ब्लडप्रेशर, शूगर के मरीजों की आंखों की जांच में काफी सहयोग मिलता है। ग्लूकोमा की जांच के लिए मरीजों को निजी अस्पताल में करीब ढ़ाई से तीन हजार रुपए खर्च करने पड़ते थे। अब अस्पताल में ये सुविधा शुरू होने से मरीजों की आंखों की जांच की सुविधा नि:शुल्क मिल सकेगी। अस्पताल के नेत्र विभाग ओपीडी में रोजाना करीब 150 मरीज पहुंचते हैं। इनमें 3-4 मरीज ग्लूकोमा बीमारी से ग्रसित होते हैं।

धीरे-धीरे जाती है आंखों की रोशनी
नेत्र रोग विशेषज्ञों ने बताया कि ग्लूकोमा आंख से जुड़ी ऐसी बीमारी है, जिससे रोशनी धीर-धीरे चली जाती है। इसका पता तब चलता है जब आंख को 20 से 30 फीसदी नुकसान हो चुका होता है। निजी अस्पतालों में महंगी जांच के कारण कई बार मरीज ग्लूकोमा की जांच नहीं करवा पाते। अब जनाना अस्पताल में नई टेक्नोलॉजी की मशीन से ग्लूकोमा जांच की सुविधा उपलब्ध हो सकेगी। नेत्र विभाग डॉ.रवीन्द्र कुमार मीणा ने बताया कि ग्लूकोमा को साइलेंट कीलर भी कहा जाता है। डॉक्टरों को इसके लक्षण नहीं मिलते। यह दो तरह का होता है। एंगल क्लोजर और ओपन एंगल। ओपन एंगल बहुत ज्यादा कॉमन है। इसे ही साइलेंट कीलर के तौर पर जाना जाता है। आई स्पेशलिस्ट इसलिए इसका जल्द इलाज कराने की सलाह देते हैं। चिकित्सकों की माने तो जिन लोगों का नम्बर की वजह से बार- बार चश्मा बदल रहा हो, जिनको इंद्र धनुष जैसी सर्कल दिखाई दे रही हो,ब्लड प्रेशर, डाइबिटीज हो, जिनकी उम्र 40 से ज्यादा हो उन्हें एक बार ग्लूकोमा जांच अवश्य करानी चाहिए।

मरीजों के लिए बहुत उपयोगी-
आप्टिकल कोहेरेंस टोमोग्राफी(ओसीटी)जांच मशीन नेत्र मरीजों के लिए बहुत ही उपयोगी है। इससे शूगर वाले मरीजों की आंखों के पर्दे में पानी भर जाने व छोटी-छोटी परेशानी का भी आसानी से पता चल जाता है। आंख के पर्दे व इससे जुड़ी जांच के लिए पहले मरीज को कोटा या जयपुर जाना पड़ता था, अब ये जांच झालावाड़ नेत्र रोग विभाग में आसानी से हो रही है।
डॉ.आरके मीणा, नेत्र रोग विशेषज्ञ, मेडिकल कॉलेज झालावाड़।