हाड़ौती में गंगा के समान पवित्र माने जाने वाली मोक्षदायिनी चंद्रभागा नदी को जिला एवं नगर पालिका प्रशासन की उदासीनता के चलते ट्रेचिंग ग्राउंड बना दिया। नदी के किनारे कचरे के साथ-साथ मृत मवेशी भी डाल रहे हैं। अब तो नदी का पवित्र समझा जाना वाला पानी भी बदबू मारने लगा है। अभी जो बच्चे बीमार हुए हैं उनके लिए भी यही माना जा रहा है उन्होंने नदी का पानी पिया है। इससे उनको उल्टी-दस्त हुए हैं।
जानकारी के अनुसार जलदाय विभाग के हेड वर्कस के पास और सूरजपोल चुंगी नाका के समीप चंद्रभागा पुलिया के यहां नदी के तट पर नगर से एकत्र की जाने वाली गंदगी और मृत पशुओं को डाला जा रहा है। नदी के तट पर गंदगी के ढेर देखें जा सकते हैं। यह सारी गंदगी नदी में समाहित हो रही है।
लगातार हो रहा अतिक्रमण
नदी के बड़े भूभाग पर कई लोगों ने अतिक्रमण कर लिया है। जिससे इसका आकार लगातार सिकुड़ता जा रहा है और यह पवित्र नदी धीरे-धीरे नाले का रूप लेने लगी है। नदी के आसपास कई कालोनियां व कच्ची बस्तियां विकसित हो गई है। अब इन कॉलोनियों के सीवरेज का पानी भी नदी में ही जा रहा है। साथ ही नगर के कई गंदे नाले भी नदी में मिल रहे हैं। इसके इसकी पवित्रता प्रभावित हो रही है। अकलेरा मार्ग पर मुक्तिधाम से आगे तो नदी का अस्तित्व ही समाप्त होता दिखाई देने लगा है। कई लोगों ने नदी की भूमि पर अतिक्रमण कर मकान तक बना लिए हैं।
पत्रिका ने चलाया था समाचार अभियान
राजस्थान पत्रिका ने वर्ष 2016 में इस नदी की दुर्दशा पर समाचार अभियान के बाद तत्कालीन सरकार ने साबरमती नदी की तर्ज पर विकसित करने के लिए 20 करोड़ रुपए की डीपीआर बनाई थी। बाद में किन्हीं कारण राशि में कटौती कर 5 करोड रुपए स्वीकार किए गए। इससे नदी के तट पर घाटों का निर्माण करवाया। लोगों का कहना है कि सरकार की डीपीआर के अनुसार नदी का विकास होना चाहिए, तभी इसका अस्तित्व बचा रह सकता है।
धार्मिक महत्व
चंद्रभागा नदी का धार्मिक महत्व है, नदी के तट पर चंद्रभागा कार्तिक मेला आयोजित किया जाता है। इसमें बाहर से हजारों की संख्या में दर्शक मेला देखने आते हैं। इसके साथ ही कार्तिक पूर्णिमा पर हजारों श्रद्धालु इस नदी में आस्था की पवित्र डुबकी लगाते हैं। इसके अलावा शनिवारी और सोमवारी अमावस्या पर भी दूर-दूर से श्रद्धालु यहां स्नान करने के लिए आते हैं। कार्तिक पूर्णिमा पर पशुपतिनाथ मंदिर और संकट मोचन हनुमान मंदिर पर भंडारा आयोजित किया जाता है जिसमें हजारों श्रद्धालु प्रसादी ग्रहण करते हैं। कई श्रद्धालु इस नदी का पानी भी पीते हैं।
नदी के तट पर मृत पशुओं को डालने की शिकायत मिली थी। इसके बाद साटिया जाति के लोगों को चिन्हित की गई जमीन पर यह पशु डालने के लिए पाबंद किया गया था, यदि ऐसा कर रहे हैं तो इन्हें दुबारा चेतावनी दी जाएगी। नदी के आसपास गंदगी डालने पर रोक लगाई जाएगी।
वर्षा मनीष चांदवाड़, अध्यक्ष नगर पालिका झालरापाटन