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Vine Tomato जानें, बेल वाले टमाटर की विशेषता

लगभग पैंतालीस से पचास दिन बाद टमाटर आने लग जाते हैं। खास बात यह है कि एक बार लगाने के बाद पानी व पौषक तत्व बराबर मिलने पर यह बेल पूरे एक साल तक रह सकती है। इसमें बूंद बूंद प्रणाली से सिंचाई की जाती है, इस कारण पानी भी कम लगता है। पूरे वर्ष इसकी वानस्पितक वृद्धि होती रहती है।

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Vine Tomato Specialty

 


राजेश शर्मा

अभी तक आपने पौधे के ही टमाटर लगते देखे होंगे, लेकिन अब बेल के भी टमाटर आने लगे हैं। यह टमाटर साधारण टमाटर से ज्यादा खट्टे हैं। साथ ही इनका उत्पादन सामान्य से पांच गुणा तक ज्यादा है। राजस्थान के झुंझुनूं जिले में भी इसकी खेती होने लगी है। Kvk Jhunjhunu
कृषि विज्ञान केन्द्र आबूसर के वैज्ञानिकों ने किसानों को प्रायोगिक रूप से दिखाने के लिए टमाटर की बेल वाली किस्म की खेती की है। आबूसर के अलावा जिले के उदयपुरवाटी, गुढ़ागौडज़ी व चिड़ावा क्षेत्र के अनेक किसान भी नई किस्म के टमाटर की खेती कर रहे हैं। Bel wale Tomato

केवीके के उद्यान वैज्ञानिक रशीद खान ने बताया कि इस बेल की ऊंचाई दस से तेरह फीट तक रहती है। यह शेडनेट में लगाया जाता है, इसमें पाळे व लू का असर ज्यादा नहीं होता। पानी कम लगता है और बीमारियां व कीट भी कम लगते हैं। तोडऩे के कई दिन तक खराब भी नहीं होता।

बारह माह रहती है बेल
केवीके Kvk abusar के अध्यक्ष एवं प्रमुख वैज्ञानिक डॉ. दयानंद के अनुसार इस बेल को बारह माह में कभी भी लगा सकते हैं। लगभग पैंतालीस से पचास दिन बाद टमाटर आने लग जाते हैं। खास बात यह है कि एक बार लगाने के बाद पानी व पौषक तत्व बराबर मिलने पर यह बेल पूरे एक साल तक रह सकती है। इसमें बूंद बूंद प्रणाली से सिंचाई की जाती है, इस कारण पानी भी कम लगता है। पूरे वर्ष इसकी वानस्पितक वृद्धि होती रहती है। टमाटर की नई विधि से खेती करने वालों के लिए श्रेष्ठ साबित हो सकती है। जो किसान इसकी खेती देखना चाहते हैं वे केवीके में आकर देख सकते हैं। कम जगह में खेती करके भी अच्छा मुनाफा कमा सकते हैं।

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