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जोधपुर

विश्व के कृषि वैज्ञानिकों ने जोधपुर में रखी एक और हरित क्रांति की योजना, 2.7 अरब लोगों को मिलेगी राहत

शुष्क जमीन पर आयोजित अंतरराष्ट्रीय सेमिनार में काजरी ने शेष विश्व के लिए रखी एक और हरित क्रांति की योजना

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स्टोरी : गजेंद्र सिंह दहिया/वीडियो : मनोज सैन/जोधपुर. समूचे विश्व की 41 फीसदी सूखी जमीन के लिए भारत की तरफ से जोधपुर स्थित केंद्रीय शुष्क क्षेत्र अनुसंधान संस्थान (काजरी) ने विशेष योजना के रूप में घोषणा पत्र तैयार किया है। जिसमें 2.7 अरब लोग कवर होंगे। घोषणा पत्र में भूरी जमीन को हरी करने के लिए एक और हरित क्रांति की आवश्यकता बताई गई है। घोषणा पत्र को शुष्क क्षेत्र में काम करने वाले विश्व के प्रमुख संगठनों को सौंप दिया गया है। सुझाव व सुधार के बाद यह योजना पूरे विश्व में लागू की जाएगी। इसी के साथ जोधपुर में पिछले चार दिन से शुष्क जमीन पर चल रहे 13 वें अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन का समापन हो गया। भारत में यह पहला सम्मेलन था। जिसकी सफलता को देखते हुए मिश्र स्थित इंटरनेशनल कॉन्फ्रैंस ऑन डवलपमेंट ऑफ ड्राईलैण्ड ने फिर से भारत में सम्मेलन करने की बात भी कही।

इसलिए बनाया जोधपुर घोषणा पत्र, जानिए 7 खास वजह
1. सूखाग्रस्त क्षेत्र में फसलों का उत्पादन बढ़ाया

जोधपुर स्थित काजरी ने 1974 से 2016 तक कई फसलों का उत्पादन बढ़ाया।

फसल ——— वृद्धि प्रतिशत में
बाजरा ———254
मंूग ——— 179
तिल ———144
ग्वार ——— 98
मोठ ———93

2. राजस्थान में बुवाई क्षेत्र बढ़ाया

– 1960-61 में 8.36 मिलियन हेक्टयर था
– 2014-15 में बढकऱ 11.2 मिलियन हेक्टर हो गया

3. धोरों का स्थिरीकरण

– 4 लाख हेक्टेयर में धोरों को स्थिर कर दिया और धोरों पर खेती शुरू हो गई।

4. शेल्टर बेल्ट प्लांटेशन
– 800 किलोमीटर की लम्बाई में पौधरोपण किया गया। इससे प्रदेश की सबसे बड़ी नहर इंदिर गांधी मरुस्थल में आगे बढ़ सकी।

5. आंधी के तूफान घटे

1966 में 17 आंधिया वार्षिक आती थी
2000 में 2.5 आंधी प्रति वर्ष रह गई

6. वायु अपरदन क्षेत्र घटा
1990 में 75 प्रतिशत भाग पर वायु से अपरदन हो जाता था
2013 में 73 प्रतिशत भाग पर होता है।

7. धोरों का क्षेत्रफल घटाया
1990 में 54 प्रतिशत मरुस्थल में धोरे मिलते थे
2013 में 48 प्रतिशत भाग पर ही धोरे रह गए

एशिया व अफ्रीका में बढ़ती आबादी चुनौती
विश्व में 41.3 प्रतिशत भाग पर सूखी जमीन है जो 60.9 मिलियन वर्ग किलोमीटर में फैली है। इसमें 6.6 प्रतिशत मरुस्थल, 10.6 प्रतिशत अद्र्ध मरुस्थल, 15.2 प्रतिशत घास के मैदान और 8.7 रैंजलैण्ड शामिल हैं। वर्तमान में एशिया व अफ्रीका की बढ़ रही आबादी के लिए पेट भरना चुनौती है। दोनों ही महाद्वीपों की आबादी में 2050 तक एक-एक अरब लोग अतिरिक्त जुड़ जाएंगे। ये दोनों महाद्वीप विश्व की एक तिहाई जनसंख्या का प्रतिनिधित्व करते हैं और सबसे गरीब व विकासशील देश भी यहीं पर है।