जोधपुर।
व्यापारी से दस लाख रुपए रिश्वत लेने के मामले में गिरफ्तार केन्द्रीय वस्तु एवं सेवा कर (सीजीएसटी) के निरीक्षक अंकित असवाल और दो मध्यस्थों को सीबीआइ ने शनिवार को रिमाण्ड पर भेज दिया गया। सीबीआइ ने आइआरएस अधिकारी व सीजीएसटी इंटेलीजेंस विंग के सहायक निदेशक संदीप पायल की भूमिका के बारे में भी जांच शुरू की है।
सीबीआइ सूत्रों के अनुसार प्रकरण में गिरफ्तार जयपुर निवासी सीजीएसटी के निरीक्षक अंकित असवाल, बतौर मध्यस्थ रूपलक्ष्मी ज्वैलर्स के मालिक अशोक गुप्ता व उनके कर्मचारी प्रदीप कुमार उर्फ सोनू खण्डेलवाल को दोपहर में सीबीआइ मामलात की विशेष अदालत में पेश किया गया, जहां से तीनों को दो-दो दिन के रिमाण्ड पर भेजने के आदेश दिए गए। रिश्वत राशि के संबंध में आरोपियेां से पूछताछ की जा रही है।
निरीक्षक अंकित असवाल वर्ष 2021 में सीजीएसटी इंटेलीजेंस विंग में थे। तब उन्होंने मण्डोर नौ मील में सागर इण्डस्ट्रीज में दबिश दी थी। कम्पनी के पुराने साझेदार चंपालाल सोनी के पावटा सी रोड पर मकान में भी तलाशी ली गई थी। व्यापारी की गिरफ्तारी का डर दिखाकर व मामला खत्म करने की एवज में रिश्वत मांगी गई थी। कुछ समय बाद निरीक्षक का तबादला सीजीएसटी की दूसरी शाखा में हो गया था। इसके बावजूद निरीक्षक ने दबाव डालते हुए रिश्वत मांगना जारी रखा था।
व्यापारी ने रिकॉर्ड की निरीक्षक की रिश्वत मांग
17 जनवरी को सीजीएसटी निरीक्षक अंकित असवाल ने व्यापारी चंपालाल को व्हॉट्सऐप कॉल किया था। उसने कहा था कि उसकी आइआरएस संदीप पायल से बात हो गई है। उसका काम हो गया है। दस लाख रुपए जयपुर में रूपलक्ष्मी ज्वैलर्स को दे दो। कुछ ही देर बाद ज्वैलर अशोक ने व्यापारी को कॉल कर कहा कि वो दस लाख रुपए आज ही उसे पहुंचा दे। व्यापारी ने दोनों से बातचीत रिकॉर्ड कर सीबीआइ से शिकायत कर दी।