जोधपुर. जम्मू-कश्मीर राज्य में लद्दाख के लोगों को अब दो महीने अतिरिक्त पेयजल द्रव अवस्था में उपलब्ध होगा। इसके लिए केंद्रीय शुष्क क्षेत्र अनुसंधान संस्थान (काजरी) के लेह स्थित क्षेत्रीय केंद्र ने स्थानीय विशेषज्ञ के साथ पाइप टेक्नोलॉजी पर काम शुरू किया है। पाइप के माध्यम से हिमालय के ग्लेशियर का पानी घाटी में दूर बसे गांवों में सीधा लाया जाएगा। इससे चार की बजाय छह महीने तक क्षेत्रवासियों को बगैर बर्फ पिघलाए पानी मिल सकेगा। भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आइसीएआर) ने इसके लिए लद्दाख में विशेष पाइप उपलब्ध करवाने की मंजूरी दी है।
लद्दाख में आबादी वाले गांव समुद्र तल से करीब 18 हजार फीट की ऊंचाई तक बसे हुए हैं। यहां सबसे बड़ी समस्या पीने के पानी की है। सर्दियों में तापमान माइनस 35 डिग्री सेल्सियस तक चला जाता है। पानी नहीं होने से छह महीने तक वहां होटल व पर्यटन बंद रहता है। एकाध होटल खुला रहता है जो एक सामान्य कमरे का किराया भी 22 हजार रुपए तक लेता है। लद्दाख के लोग अगस्त से लेकर मई तक ग्लेशियर तोडकऱ उसे पिघलाकर काम चलाते हैं। मई महीने में गर्मी पडऩे से ग्लेशियर नीचे से स्वत: पिघलने लगते हैं और अगस्त महीने तक उन्हें आसानी से पानी द्रव अवस्था में उपलब्ध हो जाता है।
चोटी पर बनेगा छोटा कुआं
हिमालय के ग्लेशियर की चोटियों पर कुछ छोटे कुएं बनाए जाएंगे, जिसमें मार्च महीने में पानी द्रव अवस्था में आ जाता है। इनसे एक विशेष पाइप निकालकर उसे पहाड़ों के सहारे-सहारे गांव तक लाया जाएगा। इन पाइपों में पानी हल्की सर्दी पडऩे तक नहीं जमेगा। मार्च से लेकर अगस्त तक पीने का पानी आसानी से मिल जाएगा। इसके बाद वर्षपर्यंत पानी उपलब्ध कराने के लिए अन्य टेक्नोलॉजी पर काम किया जाएगा। विशेष बात यह है कि वहां लद्दाख के लोगों के पास ऐसे पाइप भी उपलब्ध नहीं है। इन पाइप को काजरी की ओर से उपलब्ध करवाया जाएगा।
पानी सबसे बड़ी समस्या
लद्दाख में पानी की सीमित उपलब्धि सबसे बड़ी समस्या है। इसी कारण वहां वनस्पति नहीं होती है। सर्दियों में लोगों के पास पीने का पानी तक नहंी होता है। हमनें वहां स्थानीय विशेषज्ञ के साथ पाइप उपलब्ध करवाकर समस्या को थोड़ा कम करने की कोशिश करेंगे।
डॉ. ओपी यादव, निदेशक, काजरी जोधपुर