
वीडियो क्रेडिट : दिलावर सिंह राठौड़/बेलवा/जोधपुर. जोधपुर जिले के पराक्रमी वीर मेजर शैतानसिंह पर राजस्थान ही नहीं अपितु पूरे भारत वर्ष को गर्व है। प्रतिवर्ष उनके बलिदान दिवस पर जनमानस अपने श्रद्धासुमन अर्पित कर गौरवान्वित होता है। परमवीर चक्र मेजर शैतानसिंह के बलिदान दिवस पर मायड़ भाषा राजस्थानी के जाने माने कवि मदनसिंह राठौड़ ने काव्यात्मक श्रद्धांजलि अर्पित की है। उल्लेखनीय है कि भारत चीन युद्ध 1962 के दरमियान 13 कुमायूं रेजिमेंट के मेजर शैतानसिंह 18 नवंबर 1962 को रेजांगला पोस्ट चुशूल पर मातृभूमि की रक्षा करते हुए शहीद हो गए थे। उनकी अप्रतिम वीरता और अदम्य साहस के कारण उनको सर्वोच्च वीरता पुरस्कार परमवीर चक्र, मरणोपरांतद्ध से नवाजा गया।
पढि़ए यह काव्यांजलि
पग पग पळकै पूतळै, पग पग पळकै पाट।
पग पग सतियां सूरमा, मुरधर री इण माट।।
जादम कुळ में जनमियौ,सुभटां रौ सिरताज।
समर भौम में सूरमै, रखी हिंद री लाज।।
हद लड़ियौ सुत हेम रौ,अड़ियौ राखण आंण।
मुड़ियौ नह पाछौ मरद, सीमा पर सैतांण।।
अरपूं सूरां अंजळी, अंतस रा अरमान।
प्रात उठंतां नित करूं, शहीदां रौ सम्मान।।
परगळ खप्पर पूरती, रणचंडी कर रास।
मुंडमाळ गळ धारणी,खड़गां भीगी खास।।
हाथ पताका हिंद री, ऊंची राख उतंग।
रगत हिमाळै रासियौ, उर में देस उमंग।।
काटकियौ बण केहरी,झाटकियौ अरि झाड़।
पातळ रौ पण पाळतां, रोपी हाथळ राड़।।
दिस दिस दीपै देवळै,दिस दिस थपिया थान।
संत सती अर सूरमा, रंग है राजस्थान।।
हाटां दीसै हेत री, पाटां में परगट्ट।
माटां मुरधर मोकळी, राखण नै रजवट्ट।।
कर दहाड़ केहर जिसी, जादम लड़ियौ जंग।
सुत जायौ सैतान नै, (उण) रजपूतण नै रंग।।
जामण थैं जायौ भलौ, शूरवीर शैतान।
परमवीर जिण पावियौ,मुलक बढायौ मान।।
हटियौ नी सुत हेम रौ, डटियौ रण में आय।
कटियौ जादम केहरी, मिटियौ माटी मांय।।
लड़ियौ जद लंकाळ वौ, भिड़ियौ कर भाराथ।
अड़ियौ जस अंकास में, पड़ियौ नह वौ प्राथ।।
भुरजाळौ भाटी भमै, हुवौ चीन हैरान।
सनमुख लड़ियौ सूरमौ,सुरग गयौ सैतान।।
करज चुकायौ कोड सूं, हद हेमाळै पोढ।
सुरग हेमसुत हालियौ, अंग तिरंगो ओढ।।
अड़ी भुजा असमांन सूं,भड़ किवाड़ भाटीह।
वसुधा तणौ विछावणौ, गूंज उठी घाटीह।।
खरौ रयौ रणखेत में, पाछा दिया न पांव।
भाटी थैं सहिया भला, घट रै ऊपर घाव।।
डटियौ पण हटियौ नहीं,सिंघ आखरी सांस।
दीपै भारत देस में, परमवीर परकास।।
सिंह गरजियौ चुसूळ पर,मायड़ राखण मान।
दुसमी पग पाछा दिया, भड़ भाटी सैतान।।
सूरापण सैतांन रौ, वसुधा पर विखियात।
देस धरम हित दीपियौ,अमर हुवौ अखियात।।
कीरत खाटी कौम री, गौरव थाटी गोद।
पण भाटी जद पोढियौ, माटी कीधौ मोद।।
जादम थूं भल जूंझियौ, हद हेमाळै तीर।
सुरग गयौ सैतानसी, वरै अपसरा वीर।।
धिन जरणी री कूख नै, जिण जायौ सैतान।
लड़ियौ हिंद रौ लाडलौ,अड़ियौ जस असमान
धिन जणणी धिन हेमजी,धिन बांणासर गाम।
धिन मुरधर धिन भारती, धिन सैतांनौ नाम।।
समरांगण सैतानसी, राखी रजवट आंण।
अंजसै भारत आजलग, परमवीर रै पांण।।