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स्मृति ईरानी की जनसभा से पहले मजदूरों को पुलिस ने किया नजरबंद

पिछले 20 माह से लाल इमली कर्मचारियों को वेतन नहीं मिलने से मंत्री के कार्यक्रम में विरोध-प्रदर्शन के ऐलान के बाद पुलिस ने यूनियन के नेताओं को घरों में किया बंद।

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कानपुर। पिछले 20 माह से लाल इमली के कर्मचारियों और मजदूरों को वेतन नहीं मिला। रविवार को कपड़ा मंत्री स्मृति ईरानी के कानपुर आने की जानकारी मिलने पर युनियन के नेताओं ने उनकी जनसभा में प्रोटेस्ट का आवह्न किया। पुलिस ने सुबह ही सभी नेताओं को उनके घरों में नजरबंद कर दिया था। साथ ही कुछ मजदूरों को हिरासत में लेकर थाने में बैठा लिया। इस पर मजूदरों के खासा आक्रोश है और उन्होंने ऐलान किया है कि यदि 15 दिनों के अंदर भुगतान नहीं किया गया तो वो लोकसभा चुनाव में मतदान नहीं करेंगे।

20 माह से नहीं मिला वेतन
लाल इमली के हालात बेहद खराब हैं। मजदूरों को 20 महीनों से वेतन नहीं मिल रहा है। इसी के चलते यूनियन के नेताओं ने कपड़ा मंत्री स्मृति ईरानी की जनसभा की जानकारी मिलने पर प्रोटेस्ट का ऐलान किया था। पुलिस-प्रशासन ने यूनियन के नेताओं को घरों के अंदर नजरबंद कर दिया। मंत्री के जाने के बाद उन्हें घर से बाहर आने दिया गया। जिससे मजदूरों में गुस्सा है। यूनियन के नेता आशीष पांडेय ने बताया कि हम अपनी बात मंत्री तक पहुंचाना चाहते थे, लेकिन पुलिस ने हमें जबरन घरों के अंदर कैद कर दिया। मजदूरों ने तय किया है कि यदि पंद्रह दिनों के अंदर 20 का बकाया वेतन नहीं मिला तो लोकसभा चुनाव में मतदान नहीं करेंगे।

41 मजदूरों को हो चुकी है मौत
आशीष पांडेय ने बताया कि वेतन नहीं मिलनें के चलते कर्मचारियों और मजदूरों के परिवार भुखमरी की कगार पर पहुंच चुके हैं। पिछले दो साल के अंदर 41 मजदूरों की मौत हो गई है। युनियन के नेता ने बताया कि दिसबंर माह में अनिल नाम के मजदूर की मौत र्हुअ थी। उसके पहल 25 मार्च को रामकेश वर्मा, 30 मार्च को रामलाल, और 5 अप्रैल को नीलू मिश्रा की मौत हो चुकी है। वहीं केंद्र में भाजपा सरकार आने के बाद से 20 मिल कर्मचारियों को मृत्यु हो चुकी है।

भाजपा सरकार में रूका वेतन
मजदूर नेता ने बताया कि आखरी बार वर्ष 2013-14 में मिल के वेतन मद में पैसा सरकार की ओर से डाला गया है। भाजपा सरकार आने के बाद एक रुपये का बजट भी मजदूरों के वेतन के लिए जारी नहीं किया गया। कईबार कपड़ा मंत्री स्मृति ईरानी के अलावा यूपी सरकार में मंत्री सतीश महाना और सत्यदेव पचैरी से लिखित में शिकायत की गई, लेकिन सुनवाई नहीं हुई। इसी के बाद हमलोगों ने मंत्री के कार्यक्रम में लोकतांत्रिक तरीके से विरोध का ऐलान यिका था।