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ईसर-गणगौर का निकाला बिनौरा, गीतों पर महिलाओं ने किया नृत्य
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ईसर-गणगौर का निकाला बिनौरा, गीतों पर महिलाओं ने किया नृत्य

हिण्डौनसिटी. राजस्थानी परम्परा में सुहागिनों के सबसे बड़े त्योहार गणगौर को लेकर महिलाओं में खासा उल्लास है। महिलाएं आस्था के साथ गणगौर माता की 16 दिवसीय पूजा कर रही हैं। पूजा में रिवाज के अनुसार गणगौर की सखी बनीं सखियों महिलाओं ने ईसर गणगौर का शाम को बिनौरा निकाला जा रहा है।
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हिण्डौनसिटी. राजस्थानी परम्परा में सुहागिनों के सबसे बड़े त्योहार गणगौर को लेकर महिलाओं में खासा उल्लास है। महिलाएं आस्था के साथ गणगौर माता की 16 दिवसीय पूजा कर रही हैं। पूजा में रिवाज के अनुसार गणगौर की सखी बनीं सखियों महिलाओं ने ईसर गणगौर का शाम को बिनौरा निकाला जा रहा है।
शहर के ज्योति नगर में 10 वर्ष से हर गणगौर की 16 दिवसीय पूजा कर रही महिलाओं ने रविवार को ईसर-गणगौर का चौथा बिनौरा निकाला। गणगौर सखी मंडल की ममता शिवभगवान मित्तल ने बताया कि उनके घर पर होली की दौज के दिन से ईसर-गणगौर विराजित किए हुए हैं। सुबह मंडल की सभी महिलाएं पास स्थित बगीची से जल कलश को दूब-फूलों से सजा कर नियमित पूजा की जा रही है। मंडल की सदस्य दोपहर में बिनौरा लेकर शाम को ईसर-गणगौर को अपने घर आमंत्रित कर करती है। रविवार को ममता रीठौली के घर शोभायात्रा के रूप में ईसर गणगौर की प्रतिमा ले जाई गई। जहां गणगौर माता को सुहाग सामग्री भेेंंट की गई। महिलाओं ने ठंडाई, मिठाई आदि की भेंंट की। साथ ही परम्परागत गीतों पर नृत्य किया। बाद में ईसर गणगौर को पूजा स्थल के लिए बिनौरा निकाल का पहुुंचाया गया। इस दौरान सखी मंडल की मीना, सुमन, ललिता, राधा, प्रियंका, मनीषा, रश्मि, प्रिया,मंजू व शीला सहित अनेक महिलाएं शामिल रही। दो महिलाएं ईसर-गणगौर के रूप में सजी। कार्यक्रम में महिलाओं को अल्पाहार भी कराया गया।