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राजस्थान के किसानों को बड़ी राहत, अब जमीन के हिसाब से मिलेगा खाद, फार्मर आईडी से जुड़ेगी पूरी जानकारी

Rajasthan Farmers News: राजस्थान सरकार ने खरीफ सीजन से पहले अनुदानित खाद वितरण की नई व्यवस्था लागू की है। अब जमीन के हिसाब से खाद मिलेगा और बिक्री फार्मर आईडी से जुड़ी होगी। आईडी नहीं होने पर जमाबंदी, पट्टा या बटाईनामा मान्य होगा। कालाबाजारी, जमाखोरी और जबरन टैगिंग पर सख्ती के साथ सीमावर्ती जिलों में निगरानी भी बढ़ेगी।
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करौली

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Arvind Rao

Jun 26, 2026

Rajasthan Fertilizer Distribution System

अब फार्मर आईडी वाले पात्र किसानों को प्राथमिकता से मिलेगा अनुदानित उर्वरक (पत्रिका फोटो)

Rajasthan Fertilizer Distribution System: करौली: खरीफ सीजन से पहले राज्य सरकार ने अनुदानित उर्वरकों के वितरण को लेकर नई व्यवस्था लागू की है, जिससे किसानों को और पारदर्शी तरीके से खाद उपलब्ध कराने पर जोर दिया गया है। नई व्यवस्था के तहत जहां कालाबाजारी, जमाखोरी और जबरन टैगिंग पर सख्ती बढ़ाई गई है। वहीं, ऐसे किसानों को भी राहत दी गई है, जिनकी फार्मर आईडी अभी तक नहीं बनी है।

कृषि आयुक्तालय की ओर से जारी निर्देशों के अनुसार, अब उर्वरक खरीद के दौरान फार्मर आईडी को प्राथमिकता दी जाएगी। लेकिन जिन किसानों के पास फार्मर आईडी नहीं है, वे जमाबंदी, एफआरए पट्टा, बटाईनामा या किरायानामा जैसे दस्तावेजों के आधार पर भी अनुदानित उर्वरक प्राप्त कर सकेंगे। इससे किराएदार, बटाईदार और मृतक किसानों के कानूनी वारिसों को भी खाद उपलब्ध कराने में आने वाली दिक्कतें दूर होंगी।

प्रदेश में हर वर्ष उर्वरकों की कालाबाजारी और एक जिले से दूसरे जिले अथवा दूसरे राज्यों में अवैध परिवहन की शिकायतें सामने आती रही हैं। इसे देखते हुए सरकार ने सीमावर्ती जिलों में निगरानी बढ़ाने का भी निर्णय लिया है। पुलिस और कृषि विभाग के संयुक्त स्तर पर चेक पोस्ट स्थापित कर उर्वरकों की आवाजाही पर नजर रखी जाएगी, ताकि राजस्थान के किसानों के लिए आवंटित खाद का लाभ राज्य के किसानों को ही मिल सके।

स्टॉक होने पर नहीं कर सकेंगे मनाही

यह भी सुनिश्चित करने के निर्देश हैं कि स्टॉक उपलब्ध होने पर किसानों को खाद देने से इनकार नहीं किया जाए। साथ ही विक्रेताओं को मूल्य सूची, उपलब्ध स्टॉक और गोदाम का विवरण सार्वजनिक रूप से प्रदर्शित करना होगा, जिससे किसानों को वास्तविक स्थिति की जानकारी मिल सके।

पारदर्शी होगी व्यवस्था

प्रदेश में हर वर्ष खरीफ और रबी सीजन के दौरान यूरिया की कमी और कालाबाजारी की शिकायतें सामने आती हैं। नई डिजिटल प्रणाली लागू होने के बाद खाद की बिक्री किसान की फार्मर आईडी से जुड़ जाएगी। इससे यह पता लगाया जा सकेगा कि किस किसान ने कितनी मात्रा में उर्वरक खरीदा है और उसका उपयोग किस कृषि क्षेत्र में किया जा रहा है।

अन्य उत्पाद लेने का नहीं रहेगा दबाव

किसानों की लंबे समय से रही उस शिकायत को भी देनदारी से लिया गया है, जिसमें खाद खरीदने के दौरान अन्य उत्पाद खरीदने का दबाव बनाया जाता था। अब खाद कंपनियों और विक्रेताओं को स्पष्ट चेतावनी दी गई है कि अनुदानित यूरिया, डीएपी, एनपीके, एमओपी और देनदार की बिक्री के साथ किसी अन्य गैर-अनुदानित उत्पाद की अनिवार्य टैगिंग नहीं की जाए। नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ खाद नियंत्रण आदेश के तहत कार्रवाई की जाएगी।

इनका कहना है

राज्य सरकार ने अनुदानित खादों के वितरण को लेकर नई व्यवस्था लागू की है। इससे किसानों को समय पर और उचित तरीकों से खाद उपलब्ध हो सकेगी। कालाबाजारी, जमाखोरी और जबरन टैगिंग पर रोक लगेगी। फसल बीमा, खाद वितरण, पीएम किसान सम्मान निधि जैसी योजनाओं का लाभ किसान आईडी के माध्यम से ही दिया जाएगा। इसलिए वंचित किसान अपनी आईडी शीघ्र बनवाएं, जिससे भविष्य में विभागीय योजनाओं का लाभ प्रबंध रूप से लिया जा सके। यह भविष्य में कृषि क्षेत्र में डिजिटल गवर्नेंस की दिशा में बड़ा कदम साबित होगा।
-धर्म सिंह मीना, संयुक्त निदेशक, कृषि विभाग, करौली