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Panchna Dam Controversy : 20 साल पुराना विवाद अचानक फिर क्यों और कैसे गरमाया? जानें ‘पानी के संघर्ष’ की A to Z कहानी

पूर्वी राजस्थान में पांचना बांध विवाद गहराया। हाईकोर्ट की सख्ती और किसानों के आंदोलन के बाद वॉटर वॉर की स्थिति। किरोड़ी लाल मीणा ने दी चेतावनी, जानिए पूरा मामला।
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करौली

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Nakul Devarshi

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Updated: 18 Jun 2026, 12:06 PM IST

Rajasthan Panchna Dam Controversy Eastern Rajasthan Water Dispute June 2026

Rajasthan Panchna Dam Controversy - File PIC

राजस्थान के रेतीले और पहाड़ी इलाकों में पानी की एक-एक बूंद के लिए संघर्ष कोई नई बात नहीं है, लेकिन पूर्वी राजस्थान के 3 प्रमुख जिलों- करौली, सवाई माधोपुर और गंगापुरसिटी की सीमा पर स्थित पांचना बांध का विवाद अब महज पानी की जरूरत से ऊपर उठकर एक गंभीर सामाजिक और राजनीतिक गतिरोध का रूप ले चुका है। जून 2026 के इस तपते महीने में यह दशकों पुराना विवाद एक बार फिर से ज्वालामुखी की तरह फट पड़ा है। एक तरफ जहां कमांड क्षेत्र के किसान पिछले कई दिनों से अपनी सूखी पड़ी जमीनों के लिए बांध का पानी खोलने की मांग को लेकर उग्र आंदोलन कर रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ डूब क्षेत्र के ग्रामीण अपनी पुरानी मांगों के पूरा न होने तक नहरों के गेट किसी भी कीमत पर न खुलने देने की जिद पर अड़े हुए हैं। इस दोहरे दबाव के बीच स्थानीय प्रशासन और राज्य सरकार दोनों ही धर्मसंकट की स्थिति में नजर आ रहे हैं।

क्या है 74 गांवों के विवाद का गणित?

दरअसल, पांचना बांध का निर्माण वर्ष 1977 से 2004 के बीच करौली जिले में मिट्टी के अनूठे बांध के रूप में सिंचाई और पेयजल आपूर्ति के उद्देश्य से किया गया था। लेकिन बांध के पूरी तरह तैयार होते ही इसके पानी के वितरण को लेकर दो अलग-अलग भौगोलिक क्षेत्रों के किसान आमने-सामने आ गए।

कमांड क्षेत्र : इस क्षेत्र के अंतर्गत सवाई माधोपुर और नवगठित गंगापुर सिटी जिले के कुल 35 गांव शामिल हैं। इन गांवों में मुख्य रूप से मीणा और सर्व समाज के किसान निवास करते हैं। सरकारी योजना के अनुसार, इन किसानों को बांध की मुख्य नहरों से अपनी कृषि भूमि सींचने का पानी मिलना तय था, लेकिन वर्ष 2006 के बाद से इन्हें पानी की एक बूंद भी नसीब नहीं हुई है, जिससे इनकी करीब 40,000 बीघा उपजाऊ जमीन पूरी तरह से प्रभावित हो चुकी है।

डूब/कैचमेंट क्षेत्र : यह बांध के ठीक आसपास का करौली जिले वाला इलाका है, जिसमें मुख्य रूप से 39 गांव आते हैं। इन गांवों में बहुसंख्यक रूप से गुर्जर समाज के लोग रहते हैं। बांध निर्माण के समय इन ग्रामीणों की पुश्तैनी खेती की जमीनें और मकान पानी में डूब गए थे। इनका स्पष्ट कहना है कि जब तक डूबने वाली जमीनों का उचित मुआवजा, स्थानीय युवाओं को रोजगार और सिंचाई के लिए स्वीकृत गुड़ला-पांचना लिफ्ट परियोजना का पूरा पानी उन्हें नहीं मिल जाता, तब तक वे बांध के फाटकों को छूने भी नहीं देंगे।

साल में सिर्फ 1 बार खुलता है 'थोड़ा पानी'

वक्त के साथ यह जल संकट केवल खेती और सिंचाई तक सीमित नहीं रहा, बल्कि यह दो बड़े समाजों के बीच आपसी वर्चस्व और सामाजिक वैमनस्य की वजह बन गया है। वर्ष 2006 में हुए बड़े गुर्जर आंदोलन के बाद से ही डूब क्षेत्र के ग्रामीणों ने पांचना बांध पर कड़ा पहरा लगा रखा है और नहरों के गेट खोलने पर पूरी तरह से रोक लगा रखी है।

तनाव का आलम यह है कि पिछले 20 सालों में इस बांध से नहरों के जरिए खेतों के लिए नियमित पानी कभी नहीं छोड़ा गया। पूरे साल में सिर्फ एक बार प्रसिद्ध जैन तीर्थ स्थल श्रीमहावीरजी मेले के दौरान भगवान के अभिषेक के लिए ही बहुत सीमित मात्रा में पानी नदी के रास्ते आगे भेजा जाता है। वर्तमान में दोनों पक्षों की ओर से अलग-अलग स्थानों पर महापंचायतें बुलाई जा रही हैं, जिससे क्षेत्र का सामाजिक ताना-बाना खतरे में पड़ गया है।

क्यों अचानक उग्र हुआ विवाद?

इस विवाद के बीच अब कमांड क्षेत्र के पीड़ित किसान सवाई माधोपुर के खंडीप गांव में पिछले 13-14 दिनों से चल रहे अनिश्चितकालीन महापड़ाव को छोड़कर सड़कों और पटरियों पर उतर आए। मंगलवार को ग्रामीण महिलाओं सहित आंदोलनरत किसानों ने दिल्ली-मुंबई मुख्य रेलवे ट्रैक की तरफ कूच कर दिया और रेल पटरियों के पास पहुंचकर उग्र प्रदर्शन शुरू कर दिया।

जैसे ही यह खबर फैली, रेलवे सुरक्षा बल, राजस्थान आर्म्ड कांस्टेबुलरी और स्थानीय पुलिस प्रशासन में हड़कंप मच गया। आंदोलनकारी किसानों ने अपने साथ 200 से अधिक ट्रैक्टर, जेसीबी मशीनें और डीजे साउंड सिस्टम लेकर रैलियां निकालीं, जिससे पूरे क्षेत्र में भारी तनाव का माहौल बना हुआ है।

कैबिनेट मंत्री डॉ. किरोड़ी लाल मीणा की चेतावनी!

इस पूरे संकट में राजस्थान सरकार के कैबिनेट मंत्री डॉ. किरोड़ी लाल मीणा के सीधे हस्तक्षेप ने मामले को पूरी तरह से गरमा दिया है। डॉ. मीणा ने इस संबंध में मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा से व्यक्तिगत मुलाकात की और उन्हें एक 'चेतावनी भरा' पत्र सौंपा है।

डॉ. किरोड़ी लाल मीणा ने अपने पत्र में 3 मुख्य बातें उठाई हैं:

आर्थिक तबाही: पिछले 20 वर्षों से सिंचाई का पानी न मिलने के कारण कमांड क्षेत्र के गरीब किसानों को लगभग 4000 करोड़ रुपये का प्रत्यक्ष आर्थिक नुकसान उठाना पड़ा है।

भारी पलायन: रोजगार और खेती के साधन खत्म होने के कारण सवाई माधोपुर और गंगापुरसिटी के प्रभावित गांवों से युवा और परिवार बड़े पैमाने पर दूसरे राज्यों में पलायन करने को मजबूर हो रहे हैं।

मंत्रिपद छोड़ने का अल्टीमेटम: डॉ. मीणा ने साफ लिखा है कि यदि राज्य सरकार ने माननीय उच्च न्यायालय के आदेशों का सम्मान करते हुए तुरंत नहरों में पानी नहीं छुड़वाया, तो वे किसानों के हक के लिए अपने मंत्रिपद की चिंता किए बिना खुद धरने पर बैठ जाएंगे।

सरकार और प्रशासन को स्पष्ट गाइडलाइन

इस पूरे मामले में कानूनी मोर्चे पर भी बड़ी हलचल हुई है। राजस्थान उच्च न्यायालय ने इस विवाद से जुड़ी एक अवमानना याचिका पर बेहद गंभीर रुख अपनाते हुए सरकार और प्रशासन को स्पष्ट गाइडलाइन जारी की है।

हाईकोर्ट ने अपने ताजा आदेश में शासन को सख्त अल्टीमेटम दिया है कि आगामी 3 सप्ताह के भीतर पांचना बांध की नहरों में पानी छोड़ने की व्यवस्था सुनिश्चित की जाए। यदि तय समय सीमा के भीतर अदालती आदेश की पालना नहीं की गई, तो संबंधित प्रशासनिक और पुलिस अधिकारियों को व्यक्तिगत रूप से कोर्ट में तलब कर उनके खिलाफ सख्त दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी।

दूसरी तरफ, स्थानीय पुलिस और जिला प्रशासन के अधिकारी भारी सामाजिक तनाव और दोनों समाजों के बीच खूनी संघर्ष होने के डर से बलपूर्वक नहरों के गेट खोलने की हिम्मत नहीं जुटा पा रहे हैं।

क्या है संभावित समाधान? सरकार के पास 3 रास्ते!

इस दशकों पुराने और बेहद जटिल संकट को हमेशा के लिए शांत करने और पूर्वी राजस्थान को किसी बड़े सामाजिक टकराव से बचाने के लिए भजनलाल सरकार वर्तमान में गृह राज्य मंत्री जवाहर सिंह बेढम और कृषि मंत्री डॉ. किरोड़ी लाल मीणा के माध्यम से दोनों पक्षों के सामाजिक प्रतिनिधियों को एक जाजम पर लाने का निरंतर प्रयास कर रही है। इस गतिरोध को तोड़ने के लिए 3 मुख्य रणनीतियों पर काम किया जा सकता है:

गुड़ला-पांचना लिफ्ट परियोजना को युद्ध स्तर पर पूरा करना: वर्ष 2010 में डूब क्षेत्र के 39 गांवों की प्यास बुझाने और खेती के लिए जो लिफ्ट सिंचाई योजना कागजों में बनी थी और आज भी अधूरी पड़ी है, उसे सरकार तुरंत बड़ा विशेष बजट देकर 6 महीने के भीतर पूरा करे ताकि अपस्ट्रीम के किसानों को पानी मिल सके।

विशेष मुआवजा और पुनर्वास पैकेज: डूब क्षेत्र के जिन परिवारों को बांध निर्माण के समय से अब तक उचित मुआवजा या जमीन के बदले वैकल्पिक जमीन नहीं मिल पाई है, उनके लिए सरकार एकमुश्त विशेष आर्थिक पैकेज की घोषणा करे।

जल वितरण फॉर्मूला: दोनों समाजों के वरिष्ठ प्रबुद्ध जनों की सहमति से एक ऐसा वैज्ञानिक जल वितरण फॉर्मूला तैयार किया जाए, जिसमें बांध का पानी केवल एक तरफ न रुके और नियंत्रित मात्रा में कमांड एरिया की नहरों में भी नियमित रूप से छोड़ा जाए।