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Rajasthan: अनाथ हुए 3 बच्चे, मां-पिता की मौत के बाद सहारा दादी का भी निधन; रोटी के लिए तरसे मासूम

Rajasthan News: बच्चों के सिर से पहले मां का साया उठा, फिर पिता का सहारा छिन गया और अब जिस बूढ़ी दादी के भरोसे उनकी दुनिया चल रही थी, वह भी इस जहां को छोड़कर चली गई।
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करौली

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Santosh Trivedi

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Updated: 24 Jun 2026, 4:34 PM IST

hindausn anath bacche

हिण्डौनसिटी. जमालपुर गांव की जाटव बस्ती में बुआ के साथ बैठे अनाथ भाई-बहन। Photo- Patrika

हिण्डौन सिटी। खेलने-कूदने और सपने देखने की उम्र में जमालपुर गांव के तीन मासूम भाई-बहनों की जिंदगी ने उन्हें समय से पहले ही संघर्ष का पाठ पढ़ा दिया है। बच्चों के सिर से पहले मां का साया उठा, फिर पिता का सहारा छिन गया और अब जिस बूढ़ी दादी के भरोसे उनकी दुनिया चल रही थी, वह भी इस जहां को छोड़कर चली गई। पिता के साए के बाद मां और दादी का आंचल छिनने से तीनों बच्चे बेसहारा हो गए हैं।

दरअसल, श्रीमहावीरजी पंचायत समिति की खेड़ा ग्राम पंचायत के जमालपुर गांव की जाटव बस्ती में रहने वाली 15 वर्षीय काजल जाटव, उसकी 13 वर्षीय बहन प्रिया और 11 वर्षीय भाई कृष्णा अब पूरी तरह बेसहारा हो चुके हैं। हालात इतने खराब हैं कि कई बार बच्चों के सामने भोजन का भी संकट खड़ा हो जाता है।

गांव में किसीव्यक्ति को रहम आ जाए तो खाने का इंतजाम हो जाता है, अन्यथा भूखे पेट रात गुजारने की नौबत आ जाती है। तीनों बच्चे गांव के राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय में अध्ययनरत हैं।

ग्रीष्मकालीन अवकाश होने की वजह से काजल, प्रिया और कृष्णा अभी स्कूल नहीं जा रहे हैं, लेकिन उनके सामने सबसे बड़ा सवाल यह है कि आगे पढ़ाई कैसे जारी रहेगी। किताबें, कपड़े, भोजन और दैनिक जरूरतों का इंतजाम कैसे होगा, इसका जवाब किसी के पास नहीं है।

एक-एक कर छिनते गए सहारे

परिजनों के मुताबिक बच्चों की मां आशा देवी का निधन 5 अक्टूबर 2020 को हो गया था। मां के जाने के बाद पिता हरि सिंह जाटव ने बच्चों को संभालने की कोशिश की, लेकिन 24 अप्रेल 2022 को उसका भी निधन हो गया। इसके बाद वृद्ध दादी केसर देवी बच्चों का पालन पोषण कर रही थीं। लेकिन दो माह पहले 26 मई 2026 को दादी केसर देवी की भी गुजर गई। दादी की मौत के साथ ही बच्चों के सिर से आखिरी सहारा भी उठ गया।

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योजनाओं का लाभ बंद, बढ़ी मुश्किलें

दादी केसर देवी के नाम से परिवार को एनएफएसए और पालनहार योजना का लाभ मिल रहा था। इन्हीं योजनाओं के सहारे किसी तरह घर का चूल्हा जलता था और बच्चों की बुनियादी जरूरतें पूरी हो जाती थीं। लेकिन दादी के निधन के बाद इन योजनाओं का लाभ भी बंद हो गया है। अब न तो नियमित आय का कोई साधन है और न ही बच्चों की देखभाल करने वाला कोई अभिभावक। कुछ दिनों से भोपुर निवासी बुआ लीला देवी पीहर में आकर बच्चों की देखरेख कर रही हैं।

इनका कहना है…

जमालपुर गांव में तीन भाई-बहनों के अनाथ होने की जानकारी नहीं है। अगर ऐसा है तो बच्चों से संपर्क कर सरकार के स्तर पर ज्यादा से ज्यादा योजनाओं का लाभ दिलाने के प्रयास किए जाएंगे।

  • ज्ञानसिंह, विकास अधिकारी, पंचायत समिति, श्रीमहावीरजी।