काली नाथ एक बेटे को पांचवीं कक्षा तक पढ़ने के बाद उसे पढ़ाई छोड़नी पड़ी। आज वह कभी खेतों में मजदूरी करता है, तो कभी गांव में जो भी बुला ले, उसके पास जाकर दिन भर मेहनत कर केवल 10 रुपए कमाता है। यह हालात सिर्फ एक परिवार की त्रासदी नहीं है, बल्कि यह स्थानीय सिस्टम की खामियों और हमारी संवेदनहीनता का आइना भी है।