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चना की ऊंची एमएसपी के बावजूद किसानों का किनारा, मंडी में भी सुस्त आवकखरीद केन्द्र पर मंगवाए बारदाने का नहीं उपयोग
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चना की ऊंची एमएसपी के बावजूद किसानों का किनारा, मंडी में भी सुस्त आवकखरीद केन्द्र पर मंगवाए बारदाने का नहीं उपयोग

हिण्डौनसिटी. केन्द्र सरकार की ओर से रबी फसली खरीदी सीजन में चना की न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) में बढ़ोतरी करने के बावजूद किसानों ने खरीद केन्द्रों से दूरी बना रखी है। वहीं कृषि उपज मंडी में भी चना की आवक सुस्त है। जबकि जिले में चना बुवाई का रकवा और उपज का आंकलन गत वर्षों […]

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हिण्डौनसिटी. केन्द्र सरकार की ओर से रबी फसली खरीदी सीजन में चना की न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) में बढ़ोतरी करने के बावजूद किसानों ने खरीद केन्द्रों से दूरी बना रखी है। वहीं कृषि उपज मंडी में भी चना की आवक सुस्त है। जबकि जिले में चना बुवाई का रकवा और उपज का आंकलन गत वर्षों के समक्ष की है। बीते डेढ़ माह में कृषि उपज मंडी में चना के करीब डेढ़ हजार कट्टों का बेचान हुआ है। वहीं एमएएसपी की दर मंडी भाव से काफी ज्यादा होने के बावजूद जिले में चना की सरकारी खरीद का आगाज नहीं हुआ है।
राजफैड के करौली जिले में चना की खरीद के लिए क्रय विक्रय सहकारी समितियों के माध्यम से 25 मार्च से 6 केंद्र संचालित हुए हुए हैं। इन केंद्रों पर अब तक 133 किसानों ने पंजीयन कराया है, लेकिन 22 दिन बीत जाने के बाद भी एक दाना चना सरकार को नहीं बेचा गया। हिण्डौन कृषि उपज मंडी स्थित खरीद केंद्र पर सहकारी समिति द्वारा मंगवाए गए 60 गांठ बारदाना पैक ही पड़े हैं। मंगलवार को मंडी में महज 15-20 कट्टा चना की आवक हुई, जबकि डेढ़ माह में कुल 1400-1500 कट्टे की ही खरीद-फरोख्त दर्ज हुई है। इस अवधि में चना के भाव पंाच हजार से 5200 रुपए प्रति क्विंटल तक ही सिमटे रहे। व्यापारी संतोष बंडी भोला व मनोज जैन ने बताया कि इस वार मंडी में चना की आवक काफी कम है। जबकि किसानों की ओर से उपज अच्छी होने सूचनाएं थी। कमोबेश यहीं स्थिति समीपवर्ती सवाई माधोपुर जिले में है। वहां 9 में से चार केंद्रों पर चने की तुलाई हो रही है। गौरतलब है कि राजफैड ने भरतपुर जोन के सात जिलों में चना खरीद के लिए सरसों व चाना की खरीद के लिए 65 एमएसपी केंद्र स्थापित किए हैं, लेकिन इनमें से केवल 11 केंद्रों पर ही किसानों ने चना की खरीद शुरु हो सकी है।

8260 हैक्टेयर में हुई थी बुवाई
कृषि विभाग के सूत्रों के अनुसार वर्ष 2025-26 में जिले में रबी सीजन में 8 हजार हैक्टेयर चना बुवाई का लक्ष्य निर्धारित था। इसकी तुलना में किसानों ने 8260 हैक्टेयर में चना की बुवाई की थी। मौसस की अनुकूलता और फसल के रोगमुक्त रहने के कृषि विभाग के आंकलन 11137 मीट्रिक टन से अधिक उपज होने का अनुमान है।

एक्सपर्ट….
कृषि विभाग के सेवानिवृत वीडी शर्मा ने बताया कि इस बार चना कर रकवा बढ़ा है। फसल भी रोग मुक्त है। उपज गत वर्षों की तुलना में अच्छी रही है। हो सकता है किसान मंडी के भाव बढऩे का इंतजार कर रहा है। आमतौर पर एमएसपी केन्द्र से भुगतान में बिलम्व होने से किसान पीछे हटता है। लेकिन इस बार मंडी व एमएसपी के भावों में काफी अंदर के बावजूद सरकारी केद्रों पर चना नहीं पहुंचा विचारनीय बिंदु है। इस बार किसान की जरुरत की पूर्ति सरसों के बेचान से हो गई है। अब बस चना के 6 हजार6500 रुपए प्रति क्विंटल से अधिक भाव आने का इंतजार कर रहा है।

यूं बढ़ा समर्थन मूल्य
सत्र चना
2022-23 5230
2023-24 5335
2024-25 5440
2025-26 5650
2026-27 5875

फैक्ट फाइल
खरीद केद्र पंजीयन
करौली 05
टोडाभीम 78
नादौती 47
जीरौता 03
सपोटरा 00
हिण्डौन 06

इनका कहना है
इस वर्ष मंडी में चना की आवक काफी कम है। प्रति दिन इक्की-दुक्की दुकान पर 10-20 कट्टा की आवक होती है। शुरुआत में 100-150 कट्टा एकाध दिन आए थे। हालांकि उपज में खराबे की सूचना नहीं है।
सौरभ बंसल, महामंत्री
कृषि उपज व्यापार मंडल, हिण्डौनसिटी