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Jagar Dam:लबालब होने के कगार पर जगर बांध, 27 साल से चादर चलने का इंतजार,29 फीट हुआ जलभराव

हिण्डौनसिटी. अब की बार बर्षों के बाद लगातार दूसरे साल मानसून के मेहरबान होने से जिले का दूसरा बड़ा जगर बांध लबालब होने के कगार पर है। सीजन में आए दिन कैचमेंट एरिया में हो रही बारिश से जगर बांध में खुशहाली की तरंगें उठ रही हैं। 30 फीट भराव क्षमता होने 22 साल बाद बांध में जल स्तर का गेज 29 फीट पर पहुंचा है। अभी मानसून का सीजन शेष होने से क्षेत्र के लोगों को इस वर्ष बांध पर चादर चलने की उम्मीद है।

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हिण्डौनसिटी. अब की बार बर्षों के बाद लगातार दूसरे साल मानसून के मेहरबान होने से जिले का दूसरा बड़ा जगर बांध लबालब होने के कगार पर है। सीजन में आए दिन कैचमेंट एरिया में हो रही बारिश से जगर बांध में खुशहाली की तरंगें उठ रही हैं। 30 फीट भराव क्षमता होने 22 साल बाद बांध में जल स्तर का गेज 29 फीट पर पहुंचा है। अभी मानसून का सीजन शेष होने से क्षेत्र के लोगों को इस वर्ष बांध पर चादर चलने की उम्मीद है।
दरअसल इस बार मानसून की जल्दी दस्तक से क्षेत्र में जून माह के तीसरे सप्ताह में ही बारिश का दौर शुरू हो गया। ऐसे में जगर बांध में भी गत वर्ष की तुलना में 10 दिन पहले 20 जून से पानी की आवक आरंभ हो गई, हालांकि जलस्तर में इजाफा की गति धीमी रही। वहीं बीते वर्ष 2024 में सूखे पड़े बांध में 1 अगस्त को 5 फीट पानी की आवक से शुरुआत हुई थी। जिसका क्रम मानसून की विदाई तक बना रही। ऐसे में बांध करीब एक दशक बाद पर बांध का जल स्तर 28.4 फीट पहुंचा था। इस बार अच्छी शुरुआत के साथ बारिश के क्रमिक दौर से 27 अगस्त दोपहर तक बांंध में जल भराव का गेज 29 फीट तक पहुंच गया। यानी बांध के वेस्टवीयर से पानी के ओवरफ्लो में महज एक फीट शेष है। बांध क्षेत्र के गांव चिनायटा के फतेहसिंह, करसौली के कमलसिंह ने बताया कि तीन तक पहले तक बांध पर हर साल दो साल में चादर चलती थी। अब वर्ष 1998 के बाद से बांध में पूर्ण जलभराव नहीं हुआ है।

वर्ष 2003 में बढ़ाया बांध का गेज
जलसंसाधन विभाग के कनिष्ठ अभियंता उम्मेदसिंह ने बताया कि वर्ष 1957 निर्मित जगर बांंध क्षमता 24 फीट थी। जिसे वर्ष 1981 में बढ़ा कर 26.8 इंच किया गया। उस दौरान क्षेत्र में अच्छी बारिश होन से कमोबेश हर दूूससे वर्ष बांध फुल हो जाता। ऐसे में वर्ष 2003 में बांध की गेज क्षमता को 30 फीट किया गया है। वर्ष 1998 के बाद से बांध लबालब नहीं हुआ है।

चौकस हुए अधिकारी,बढ़ाई निगरानी
जगर बांध में पानी की आवक जारी रहने से जलसंसाधन विभाग के अधिकारी चौकस हो गया है। एहतियात के लिए बांध की पाल पर मिट्टी के कट्टे रखे गए हैं। वहीं 500 कट्टों में मिट्टी भराव कर हिण्डौन में रखबाया गया है। जबकि एक हजार खाली कट्टे सुरक्षित रखे हुए हैं।

बांध लबालब तो चलेंगी नहरें
क्षेत्र किसानों का मानना है कि इस बार बांध लबालब हुआ तो रबी की फसल के लिए नहरें संचालित होने की उम्मीद है। बीते एक एक दशक से अधिक समय से कम बारिश होने से पर्याप्त जलभराव के अभाव में नहरें सूखी हैंं। अंतिम बार वर्ष 2008 में नहरों में पानी छोड़ा गया था।

फैक्ट फाइल-

वर्ष बारिश(मिमी) गेज (फीट)
1990 660 26.3
1992 780 28.7
1994 851 27.9
1995 923 28.5
1998 1117 28.5
2012 987 21.4
2016 777 26.4
2024 1219 28.4
2025 698 29.00

इनका कहना है-
लगातार दूसरे साल कैचमेट एरिया में अच्छी बारिश हो रही है, जिससे बांध में पानी की आवक बनी हुई है। 30 फीट भराव क्षमता के जगर बांध में बुधवार शाम तक गेज 29 फीट पर पहुंच गया। अभी क्षेत्र में मानसून सक्रिय है। ऐसे में बांध से चादर चलने की उम्मीद है।
शिवराम मीणा, सहायक अभियंता, जल संसाधन विभाग, हिण्डौनसिटी