चंबल में चरवाहे को चबा रहा था मगरमच्छ, आपदा टीम ने भगाकर जुटाए शव के अवशेष
करणपुर. चम्बल नदी में शुक्रवार को मगरमच्छ का शिकार बने चरवाहे सरवन पुत्र मनकू कोली निवासी डंगरिया की तलाश शनिवार को भी चली, लेकिन उसका शव नहीं मिला। उसके पेट की आंत के कुछ अवशेष मिले हैं। जिनका परिजनों ने दाह संस्कार कर दिया गया। एनडीआरएफ टीम के हैड वीरेन्दर की टीम ने शनिवार सुबह दुबारा तलाश शुरू की तो चम्बल नदी में जलीय घास ( गोंदर) में बैठकर मृतक के शव को मगरमच्छ चबाते हुए दिखा। इस दौरान टीम ने मगरमच्छ को भगाया, लेकिन मगरमच्छ द्वारा शव के टुकड़े कर देने से कुछ ही अवशेष मिल सके। जिनका मेडिकल टीम के डा. लक्ष्मीकांत शर्मा सीएचसी करणपुर , डॉ अनमोल सीएचसी कैलादेवी , डॉ किशन गुर्जर सीएचसी कैलादेवी ने पोस्टमार्टम किया। इसके बाद शव के अवशेषों केा परिजनों को सौंप दिया। जिनका परिजनों ने दाह संस्कार कर दिया गया। मृतक के तीन पुत्र व एक पुत्री है। सरवन की मौत से परिजन बेहाल हैं।
मंत्री पहुंचे मौके पर, दी सांत्वना
चंबल नदी में चरवाहे को खींच ले जाने की घटना के बाद शनिवार को पंचायतीराज मंत्री रमेशचंद मीना मौके पर पहुंचे और लोगों से घटना की जानकारी ली। ग्रामीणों ने उनको चंबल नदी पर मगरमच्छों से बढ़ रहे खतरे के बारे में बताकर सुरक्षा की गुहार लगाई। मंत्री ने मृतक के परिवार को सांत्वना देकर सरकारी योजनाओं का लाभ दिलाने का आश्वासन दिया। इस दौरान उपजिला कलेक्टर यशवंत मीना सपोटरा, वृताधिकारी कैलादेवी गिर्राज प्रसाद मीना, घडिय़ाल डीएफओ अनिल कुमार यादव करौली, करणपुर थानाधिकारी लाल बहादुर मीना, एनडीआरएफ की टीम सहित अन्य कई लोग मौजूद रहे।
घोषणा पर नहीं हुआ अमल
ग्रामीणों ने बताया कि 11 वर्ष में मगरमच्छ 12 चरवाहों को अपना शिकार बना चुका है। कुछ को घायल कर दिया तो किसी की जिंदगी चली गई। 5 चरवाहों के तो टुकड़े तक नहीं मिले। ग्रामीणों ने बताया कि पंचायती राज मंत्री 22 अप्रैल 2022 को दाबर के एक युवक के परिवार को सांत्वना देने आए थे। इस दौरान उन्होंने चम्बल नदी किनारे मानवीय दुर्घटना को रोकने के लिए नदी के किनारों पर सुरक्षा जाल लगाने के लिए 10 लाख रुपए की घोषणा की थी। जिस पर आज तक अमल नहीं हुआ है।
नहीं मिलती सहायता
ग्रामीणों ने बताया कि सरकारी कागजातों को बनाने की पेचीदगियों के चलते मगमच्छ का शिकार बने लोगों के परिवारों को कोई सहायता भी नहीं मिल पाती है। मगरमच्छ पूरा शव खा गया तो ना तो अंतिम संस्कार हो पाता है ना ही कोई मुआवजा मिलता है। चंबल नदी में मगरमच्छों की संख्या लगातार बढ़ रही है। आसपास के लोगों के लिए चंबल नदी ही पेयजल का सहारा है। मवेशी यहीं पानी पीने जाते हैं। ग्रामीण भी अपनी पानी की जरूरतों को नदी से ही पूरा करते हैं। लेकिन नदी पर जाने पर उनको मगरमच्छों से जान का खतरा रहता है।
केप्शन करणपुर. चंबल नदी पर पहुंचे मंत्री रमेश मीना तथा मौके पर मौजूद ग्रामीण।