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करौली

धौलपुर से आ रही रोडवेज बस में पकड़ा 100 किलो नकली पनीर

करौली. क्षेत्र में नकली मावा और पनीर का कारोबार थम नहीं रहा है। कई बार नकली मावा-मिलावटी पनीर को पकडऩे की कार्रवाई के बावजूद मिलावटी मावा-पनीर का कारोबार किया जा रहा है। इसी क्रम में शनिवार को एक बार फिर स्वास्थ्य विभाग ने नकली पनीर पकड़ा है।

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करौली. क्षेत्र में नकली मावा और पनीर का कारोबार थम नहीं रहा है। कई बार नकली मावा-मिलावटी पनीर को पकडऩे की कार्रवाई के बावजूद मिलावटी मावा-पनीर का कारोबार किया जा रहा है। इसी क्रम में शनिवार को एक बार फिर स्वास्थ्य विभाग ने नकली पनीर पकड़ा है। धौलपुर से रोडवेज बस से लाए जा रहे करीब 100 किलो पनीर को पकड़कर जब उसकी चल प्रयोगशाला में जांच कराई गई तो पनीर अमानक पाया गया। इस पर विभाग की टीम ने नकली पनीर को जब्त कर नष्ट कराया।

मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. दिनेशचन्द मीना ने बताया कि फूड सेफ्टी एवं स्टेंडर्ड एक्ट 2006 के प्रावधानों के अनुसार मिलावटी खाद्य पदार्थ आपूर्तिकर्ताओं के विरूद्ध अभियान चलाया जा रहा है। अभियान के अंतर्गत सैंपङ्क्षलग प्रकिया संचालित की जा रही है। आमजन को शुद्ध गुणवत्तापूर्ण पूर्ण खाद्य ‘शुद्ध आहार मिलावट पर वारÓ अभियान के अंतर्गत शनिवार को यहां रोडवेज बस स्टैण्ड पर रोडवेज बस से नकली पनीर पकड़ा गया।
अभियान में गठित टीम ने एफएसओ जगदीश गुप्ता के नेतृत्व में करौली-धौलपुर मार्ग स्थित कोंडर टोल नाके पर एक रोडवेज बस की जांच की। जांच में रोडवेज बस में लावारिस अवस्था में करीब 100 किलो पनीर मिला। जिला मुख्यालय स्थित रोडवेज बस स्टैंड पर कार्रवाई करते हुए लगभग 100 किलो नकली पनीर को जब्त कर नष्ट करवाया है। उन्होंने बताया कि यह पनीर धौलपुर से करौली आने वाली रोडवेज बस में मिला। जिसकी मौके पर ही चल प्रयोगशाला में कार्मिकों से जांच कराई गई। जांच में पनीर अमानक पाया गया। इस पर पनीर के नमूने लेने के साथ पनीर को नष्ट कराया गया। उन्होंने बताया कि पनीर कहां से कौन लाया और कहां ले जाया जा रहा था, इसका पता नहीं चल सका है।
गौरतलब है कि इससे पहले भी कई बार रोडवेज बसों में लावारिस हालत में इस तरह के पनीर, मावा और मिठाई जब्त करने की कार्रवाई की जा चुकी है, लेकिन मिलावट करने वाले कभी पकड़ में नहीं आए हैं।

नहीं हो पाती कार्रवाई
यहां सवाल ये उठता है कि कई बार रोडवेज बसों में लावारिस अवस्था में नकली-मिलावटी पनीर, खाद्य पदार्थ आदि पकड़ा जाता है। लेकिन इनका परिवहन करने वाले पकड़ से दूर ही रहते हैं। इससे उनके खिलाफ कार्रवाई नहीं हो पाती। असल में जब भी नकली मावा, पनीर आदि खाद्य सामग्री पकड़ में आई है, तब वह लावारिस अवस्था में मिली है। यह पता ही नहीं चल पाता कि इसे कौन व्यक्ति कहां से लाया और कहां ले जाया जा रहा था। ऐसे में दोषी के खिलाफ कार्रवाई भी नहीं हो पाती।