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राज्य बजट को लेकर टॉक शो: क्षेत्र को मिलें ऐसी सौगात, विकास के संग समस्याओं से दिलाएं निजात

हिण्डौनसिटी. राजस्थान विधानसभा में बुधवार को मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा सरकार की वित्तमंत्री दिया कुमारी बजट पेश करेंगी। इसको लेकर शहरवासियों में उत्साह और उम्मीदों का माहौल है। लोग चाहते हैं कि बजट में ऐसी घोषणाएं हों, जिनसे क्षेत्र का विकास हो, आमजन को सुविधाएं मिलें और जनसमस्याओं से राहत मिले। राजस्थान पत्रिका द्वारा गोपाल टाकीज […]

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हिण्डौनसिटी. राजस्थान विधानसभा में बुधवार को मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा सरकार की वित्तमंत्री दिया कुमारी बजट पेश करेंगी। इसको लेकर शहरवासियों में उत्साह और उम्मीदों का माहौल है। लोग चाहते हैं कि बजट में ऐसी घोषणाएं हों, जिनसे क्षेत्र का विकास हो, आमजन को सुविधाएं मिलें और जनसमस्याओं से राहत मिले। राजस्थान पत्रिका द्वारा गोपाल टाकीज चौराहे के पास आयोजित परिचर्चा में विभिन्न वर्गों के लोगों ने अपनी अपेक्षाएं साझा कीं।
नगर परिषद के निवर्तमान लेखेंद्र चौधरी ने कहा कि शहर में जल भराव की समस्या सबसे बड़ी है। इसके लिए डीपीआर तैयार की जा चुकी है। सरकार से उम्मीद है कि ड्रेनेज सिस्टम को सुधारने के लिए बजट में राशि की घोषणा करें।
उद्यमी अशोक गुबरैटा ने कहा कि छोटे उद्योगों के लिए निर्बाध विद्युत आपूर्ति मिली चाहिए। इसके लिए विशेष एक्सप्रेस फीडर की योजना लानी चाहिए। साथ ही उद्यमियों के प्रोत्साहन के लिए सरकार को कुछ न कुछ राहत देने घोषणा करनी चाहिए।
सत्येंद्र वर्मा ने कहा कि क्षेत्र से निकल रहे टोल सडक़ों की स्थिति खराब है। जबकि वाहनों से टोल टैक्स वसूला जाता है। बजट में सडक़ों के निर्माण की घोषणा की जाए। जिससे लोगों का सुरक्षित व सुगम आवागमन हो सके। साथ ही क्षतिग्रस्त होने पर टोल रोड के नवीनीकरण तक वसूली स्थगन के प्रावधान भी तय किए जाएं।
निजी शिक्षण संस्थान ग्रुप के निदेशक मनीष चौधरी का कहना है कि शहर में 10-15 किलोमीटर दूर से विद्यार्थी पढऩे आते हैं। बालवाहिनियां टोल रोड पर सफर कर गांवों तक पहुंचती हैं। बाल वाहिनियों को टोल फ्री वाहनों की श्रेणी में शामिल करना चाहिए। साथ ही विद्यालयों को व्यवसायिक बिजली उपभोक्ता के दायरे से मुुक्त करना चाहिए।
किसान देशराज गुर्जर का कहना था कि मुख्यमंत्री नि:शुल्क बिजली योजना में शहरी किसानों का शामिल किए जाना चाहिए। ग्रामीण कृषकों को दो हजार यूनिट नि:शुल्क दी जाती है। वहीं शहरी क्षेत्र में किसान अभी तक योजना के अनुदान से वंचित हैं।
फार्मासिस्ट संतोष अग्रवाल का कहना था की सरकार बजट में दवाओं संबंधी सभी कार्य फार्मासिस्टों कराने का प्रावधान लाए। ग्रामीण चिकित्सालयों में नर्र्सिंगकर्मी ही दवा वितरण करते हैं। वहीं शहरी चिकित्सालय में भंडारण और अन्य कार्य दूसरे संवर्ग के चिकित्साकर्मियों के लिए जिम्मे है।
वीरेंद्र धाकड़ का कहना था कि नि:शक्तजनों की समस्याओं की सुनवाई के लिए उपखंड स्तर पर अधिकृत अधिकारी होना चाहिए। जो उनकी समस्याओं का निस्तारण और योजनाओं की सुविधाओं से लाभ देने की मॉनिटङ्क्षरग करे। वर्तमान में दिव्यांगजनों ने स्वयं की दिव्यांगता की पहचान के प्रमाण-पत्रों के लिए भटकना पड़ता है। निजी स्कूल संचालन वर्धमान जैन का कहना था कि शहर में सरकारी और गैर सरकारी विद्यालयों में खेल प्रतिभाएं हैं, लेकिन खिलाडिय़ों के समुचित प्रशिक्षण की सुविधा नहीं है। राज्य सरकार से आगामी बजट में शहर में स्पोट््र्स अकेड़मी खोलने घोषणा की जाए।