हिण्डौनसिटी. संविधान दिवस पर जिला मुयालय से तहसील स्तर तक अनेक कार्यक्रम हुए। जिनमें संविधान में निहित खूबियों से लोगों को अवगत कराया। लेकिन उपखंड मुयालय से 10 किलोमीटर दूर खेड़ा गांव में श्रीमहावीरजी-गंगापुरसिटी चौराहे पर स्थापित संविधान की प्रस्तावना का स्मारक अनदेखा रहा। जर्जरहाल स्मारक की मरमत और रंगाइ-पुताई कर सारसंभाल की ओर किसी ने ध्यान नहीं दिया। गंगापुरसिटी मार्ग पर गांव के राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय के बाहर 52 वर्ष पहले स्वतंत्रता सैनानियों के संघर्ष की स्मृति में आजादी की 25वीं वर्ष गांठ पर वर्ष 1972 में भारत सरकार ने शिलालेख लगवाया था। करीब साढ़े पांच फीट ऊंचे स्मारक के अग्रभाग पर संविधान की प्रस्तावना उकेरी हुई है। जिस पर संविधान के मूल उद्देश्य न्याय, स्वतंत्रता, समता और बंधुतामय विवरण के अंकित हैं। वहीं पीछे की तरफ स्वतंत्रता सैनानी रहे उपखण्ड के हिण्डौन निवासी प्रेमनिधि अग्रवाल व सूरौठ निवासी मूलचंद शर्मा का नाम अंकित है। देखरेख नहीं होने से स्मारक का फाउंडेशन जीर्ण-शीर्ण हाल में है। स्मारक पर उकेरे के प्रस्तावना के कुछ शब्दों को समाजकंटकों ने विकृत कर दिया है।
स्मारक पर हैं राष्ट्रीय प्रतीक चिह्न
संविधान प्रस्तावना के शिलालेख पर शीर्ष पर दोनों ओर राष्ट्रीय प्रतीक बने हैं। इसमें अशोक चक्र, राष्ट्रीय पक्षी मयूर, राष्ट्रीय पशु शेर व राष्ट्रीय पुष्प कमल बना हुआ है।