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रेलवे स्टेशन पर नहीं रैन बसेरा का इंतजाम, शहर के दोनों आश्रय स्थल भी बदहाल
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रेलवे स्टेशन पर नहीं रैन बसेरा का इंतजाम, शहर के दोनों आश्रय स्थल भी बदहाल

हिण्डौनसिटी. दिसम्बर का तीसरा सप्ताह बीतने के साथ ही सर्दी ने अपने तेवर तेज कर दिए हैं। न्यूनतम तापमान लगातार तीन दिन से 8 डिग्री सेल्सियस से नीचे दर्ज हो रहा है, जिससे रात में कड़ाके की ठंड पडऩे लगी है। बुधवार को न्यूनतम तापमान 9 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया। लेकिन रेलवे स्टेशन के पास नगर परिषद की ओर से रैन बसेरा शुरू नहीं किया गया है। ऐसे में रात्रिकालीन ट्रेनों के यात्रियों को रेलवे स्टेशन पर खुले में प्लेटफार्मों व वेटिंगहॉल में ही बैठकर रात गुजारनी पड़ रही है। रेलवे स्टेशन पर करीब आधा दर्जन ट्रेनों का रात में ठहराव होता है। जिनसे ग्रामीण क्षेत्र के सैकड़ों यात्री आवागमन करते हैं।
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Anil dattatrey

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Updated: 25 Dec 2025, 7:09 PM IST

हिण्डौनसिटी. दिसम्बर का तीसरा सप्ताह बीतने के साथ ही सर्दी ने अपने तेवर तेज कर दिए हैं। न्यूनतम तापमान लगातार तीन दिन से 8 डिग्री सेल्सियस से नीचे दर्ज हो रहा है, जिससे रात में कड़ाके की ठंड पडऩे लगी है। बुधवार को न्यूनतम तापमान 9 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया। लेकिन रेलवे स्टेशन के पास नगर परिषद की ओर से रैन बसेरा शुरू नहीं किया गया है। ऐसे में रात्रिकालीन ट्रेनों के यात्रियों को रेलवे स्टेशन पर खुले में प्लेटफार्मों व वेटिंगहॉल में ही बैठकर रात गुजारनी पड़ रही है। रेलवे स्टेशन पर करीब आधा दर्जन ट्रेनों का रात में ठहराव होता है। जिनसे ग्रामीण क्षेत्र के सैकड़ों यात्री आवागमन करते हैं।
सर्दी में तेजी आने पर नगर परिषद द्वारा रेलवे स्टेशन के पास ओवर ब्रिज के नीचे पांडाल लगा कर रैनबसेरा स्थापित किया जाता है। जिसमें देर रात व तडक़े की ट्रेनों से आने व सफर करने वाले गांवों के यात्री ठहरते हैं। लेकिन इस वर्ष दिसम्बर का तीसरा सप्ताह बीतने के बाद भी रेलवे स्टेशन क्षेत्र में रैन बसेरा स्थापित नहीं किया गया है। जबकि दिनोंदिन सर्दी बढऩे के साथ सर्द हवाओं का दौर शुरू हो गया है। रैन बसेरा के अभाव में देर रात ट्रेन से आए ग्रामीण क्षेत्र के यात्रियों का स्टेशन पर ठहर कर गांव पहुंचने के लिए सबेरा होने का इंतजार करना पड़ा है। हालांकि नगर परिषद की ओर से शहर में दो स्थाई आश्रय स्थल संचालित किए जाते हैं। लेकिन ये दोनों स्टेशन से करीब दो किलोमीटर दूर हैं। इनमें से एक आश्रय स्थल लंबे समय से बंद पड़ा है, जबकि दूसरा अव्यवस्थित स्थिति में है। इस कारण यात्रियों को इन स्थाई आश्रय स्थलों का लाभ नहीं मिल पा रहा है। गौरतलब है कि कुछ वर्ष पहले तक नगर परिषद की ओर सेरेलवे स्टेशन परिसर में ही रैन बसेरा स्थापित किया जाता था। सर्कूलेटिंग एरिया ने रैन बसेरा होने से देर रात की ट्रेनों के यात्री ठहरते थे। वहीं रात्रि पारी के टेम्पो चालकों को भी सर्दी से बचाव के लिए आश्रय पाते थेे।

रात में होती डेढ़ हजार यात्रियों की आवाजाही
रेलवे स्टेशन पर प्रतिदिन 42 से अधिक ट्रेनें ठहराव करती हैं। जिनसे करीब 5 हजार यात्री आवाजाही करते हैं। आधा दर्जन से अधिक ट्रेनों के रात 9.30 बजे से सुबह 5 बजे बीच आने से करीब डेढ़ हजार से अधिक यात्रियों का रात में आना जाना रहता है। गौरतलब है कि देर रात से तडक़े तक कोटा- हजरत निजामुद्दीन स्पेशल, हल्दीघाटी एक्सप्रेस, हरिद्वार – मुंबई टर्मिनस सुपरफास्ट एक्सप्रेस, मेवाड़ सुपरफास्ट एक्सप्रेस, मुंबई सेंट्रल-काठगोदाम विशेष सुपरफास्ट, काठगोदाम-मुंबई सेंट्रल विशेष सुपरफास्ट, हजरत निज़ामुद्दीन-कोटा स्पेशल ट्रेन का ठहराव होता है।

एक आश्रय स्थल ठप, दूसरे में नहीं समुचित प्रबंध
शहर में वर्ष 2016 में दीनदयाल अंत्योदय शहरी आजीविका मिशन के तहत नगर परिषद कार्यालय में बस स्टैण्ड के सामने और मोहन नगर में जिला चिकित्सालय के समीप दो स्थाई आश्रय स्थल शुरू किए गए। बस स्टैण्ड के आश्रय स्थल में रैन बसेरा नहीं चल बंद है, वहां अन्नपूर्णा रसाई संचालित है। स्थिति यह है कि भवन का नाम आश्रय स्थल से बदल मुख्यमंत्री सद्भवना केद्र और अब अन्नपूर्णा रसोई हो गया है। कमोबेश यही स्थिति जिला अस्पताल के पास के आश्रय स्थल की है। 9 पलंग तो पड़े हैं, लेकिन बिछाने को साफ सुथरे बिस्तर तक नहीं। दिशा सूचक नहीं होने से बाहर से आए लोगों को सर्द रात में रैन बसेरा ढूंढना कठिन कार्य है।

इनका कहना है-
जिला चिकित्सालय के पास का आश्रय स्थल संचालित है। निरीक्षण का व्यवस्थाओं को और सुधारा जाएगा। तेज शीत लहर की स्थिति में रेलवे स्टेशन के पास उचित स्थान तय कर अस्थाई रैन बसेरा लगाया जाएगा। शहर में रैन बसेरों के स्थानों के बारे में सूचना भी लगवाई जाएंगी।
हेमराज गुर्जर, उपखण्ड अधिकारी

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