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VIDEO: नगर निगम की बड़ी बेपरवाही: किश्तों के फेर में उलझे गरीबों के आशियाने, किसी की छत अधूरी तो किसी की छपाई

पहली, दूसरी, तीसरी, चौथी और पांचवी डीपीआर के अनुसार शहर के 45 वार्ड में 5 हजार प्रधानमंत्री आवास स्वीकृत हुए हैं। वित्तीय वर्ष 2017-18 से निर्माण चल रहे हैं, लेकिन अभी तक 50 फीसदी आवास भी पूरे नहीं हो पाए। अभी तक मात्र 1400 आवास ही पूर्ण रूप से निर्मित हो पाए हैं। 1700 से अधिक आवासों की तीसरी किश्त जारी हुई है, शेष की अभी भी बाकी है।

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कटनी

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Balmeek Pandey

Nov 18, 2019

कटनी. बालगंगाधर तिलक वार्ड निवासी 65 वर्षीय वृद्धा सोना बाई निषाद, झोपड़ी नुमा खपरैल मकान में रहकर जीवन यापन कर रही थी। प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत पक्की छत के लिए दो साल पहले सौगात मिली। वृद्धा ने दो किश्त जारी होने पर अपना आवास किसी तरह बना लिया, छपाई भी करा ली, लेकिन पिछले एक साल से तीसरी किश्त के लिए नगर निगम की बाट जोह रही है। उसे न तो किश्त मिल रही और ना ही कोई यह बताने वाला कि आखिरकार कब रुपये मिलेंगे। शहर में यह व्यथा सिर्फ सोना बाई की नहीं बल्कि लगभग दो हजार लोगों की है जो दूसरी और तीसरी किश्त के लिए नगर निगम के चक्कर काट रहे हैं। हितग्राहियों की मानें तो नगर निगम के अधिकारी उन्हें यह बात कहकर चलता कर देते हैं कि अभी रुपये ऊपर से नहीं आए या फिर जो राशि आई है पहले नए हितग्राहियों को जारी की जाएगी।

 

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50 फीसदी आवास भी पूरे नहीं हो पाए
जानकारी अनुसार पहली, दूसरी, तीसरी, चौथी और पांचवी डीपीआर के अनुसार शहर के 45 वार्ड में 5 हजार प्रधानमंत्री आवास स्वीकृत हुए हैं। वित्तीय वर्ष 2017-18 से निर्माण चल रहे हैं, लेकिन अभी तक 50 फीसदी आवास भी पूरे नहीं हो पाए। अभी तक मात्र 1400 आवास ही पूर्ण रूप से निर्मित हो पाए हैं। 1700 से अधिक आवासों की तीसरी किश्त जारी हुई है, शेष की अभी भी बाकी है। नगर निगम अधिकारी कह रहे हैं कि अंतिम किश्त में 95 हितग्राही बकाया हैं, जिनका भुगतान शीघ्र होगा, जबकि अभी भी पांच करोड़ से अधिक की राशि बकाया है।

खास-खास:
– 6-7 और सात नंबर डीपीआर अभी भी स्वीकृति के लिए अटकीं, पहली बार में तीन डीपीआर में 1700 आवासों की ही हो पाईं थी स्वीकृति।
– 250 लोगों को प्रथम किश्त जारी किया जाना है, रुपये आने के बाद भी अभी तक नगर निगम नहीं कर पाया जारी।
– प्रथम किश्त जारी करने से पहले नगर निगम कह रहा सर्वेक्षण की बात, जिम्मेदारी कर्मचारी सर्वेक्षण में नहीं दे रहे ध्यान।
– प्रथम जियोटैग के एक लाख रुपये, कॉलम व छत डलने के बाद एक लाख रुपये और फिनशिंग जारी होने के बाद 50 हजार रुपये जारी होना था।
– चौथे डीपीआर में 9 करोड़ 57 लाख आया था, 4 करोड़ 13 लाख दे दिया है, 5 करोड़ इसलिए नहीं दिया कि कॉलम के बाद छत नहीं बनाया।

 

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राशि जारी न करने पर निगम अधिकारी दे रहे गजब तर्क
किश्त समय पर जारी न होने पर नगर निगम के अधिकारी अजीब तर्क दे रहे हैं। अधिकारियों ने कहा कि कुछ बैंक मर्ज हो गए हैं। इससे खाता क्रमांक, आइएफएससी, ब्रांच कोड शायद अलग से स्वीकृत हुए हैं, इसलिए शायद राशि जारी होने में देरी हुई है।

यह भी समझें गणित
– शहर में 200 से अधिक हितग्राही नहीं बना रहे पीएम आवास, जिससे अटकी है राशि।
– तीन हजार लोगों के बन रहे हैं आवास, किश्त के अभाव में अटका है निर्माण कार्य।
– पट्टे विवाद के चलते भी आ रही समस्या, हितग्राही पात्रता की भी चल रही है जांच।
– एक सप्ताह से आ गई है राशि, फिर भी नहीं शुरू हुआ किश्तों का भुगतान।
– डीपीआर एमआइसी से अनुमोदन व कलेक्टर अनुमोदन में लगा समय।
– पार्षदों ने कहा कि उनसे कराएं वेरीफिकेशन कराया जाए, फिर भी हो रही मनमानी।

इन्हें भी है किश्तों का इतजार…
– सरमन लाल निषाद बालगंगाधर तिलक वार्ड को नहीं मिली तीसरी किश्त।
– सोना बाई पति रामसजीवन पहरुआ को नहीं मिली तीसरी किश्त।
– जमुना यादव पिता चिंता अनुज्ञा शुल्क जमा करने पर भी नहीं मिली किश्त।
– मुन्नालाल कुशवाहा लाल बहादुर शास्त्री वार्ड के किश्त पर लगा दी गई रोक।

 

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इनका कहना है
मुझे इसी माह से इस योजना का प्रभारी मिला है। मुझे वाट्सएप के माध्यम से पत्र दिया गया है, कि पीएम आवास के लिए राशि आ गई है। शीघ्र ही सत्यापन के बाद राशि जारी होगी। अटके हुए डीपीआर पर भी जल्दी स्वीकृति के लिए प्रयास किए जाएंगे।
एचपी त्रिपाठी, नोडल अधिकारी पीएम आवास नगर निगम।

प्रधानमंत्री आवास की किश्तों के लिए जांच कमेटी गठित कर दिया हूं। इसका काम अधीक्षण यंत्री शैलेंद्र शुक्ला देख रहे हैं। उनसे चर्चा कर अपडेट ले सकते हैं। बाकी किश्त जल्द जारी हों, इसके लिए प्रयास किया जाएगा।
आरपी सिंह, आयुक्त नगर निगम।

पीएम आवास के लिए राशि जारी हो गई है। इसमें वार्ड प्रभारियों की टीम बनाई गई है। वार्ड पार्षदों के साथ सत्यापन कराया जा रहा है। शीघ्र ही रुकी किस्तों का भुगमान जियो टैग के अनुसार कराया जाएगा।
शैलेंद्र शुक्ला, अधीक्षण यंत्री, नगर निगम।