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रामचरित मानस की इस चौपाई ने किसान को बनाया आत्मनिर्भर, कर रहे कमाल की खेती, देखें वीडियो

बिजली को किया बाय-बाय, सौर ऊर्जा से खेती कर कमा रहे लाखों, धान-गेहूं के बाद सब्जी की खेती में अमाड़ी के किसान कमा रहे मुनाफा, खेत में लहलहा रही वेनका टमाटर की फसल

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Balmeek Pandey

Feb 01, 2019

बालमीक पांडेय @ कटनी. ‘पराधीन सुख सपनेउ नाही, कर विचार देख मन माही’ रामचरित मानस की यह चौपाई को अपने जीवन में उतारते हुए एक किसान एक ऐसी खेती की ओर बढ़े हैं जिससे न सिर्फ बिजली विभाग की निर्भरता से निजात पा चुके हैं बल्कि अनाप-शनाप बिल और अघोषित कटौती के झंझट से मुक्त होकर सौर ऊर्जा के माध्यम से सब्जी की खेती कर हर माह हजारों रुपए का मुनाफा कमा रहे हैं। हम बात कर रहे हैं कटनी जिले की बड़वारा तहसील क्षेत्र अंतर्गत ग्राम अमाड़ी निवासी किसान मनु नारला की। जिन्होंने पहले धान और गेहूं की खेती करके उन्नत खेती का लोहा मनवाया, वहीं अब सब्जी की बेहतर खेती कर सालाना लाखों रुपए की कमाई कर रहे हैं। कृषक मनु लगभग 20 एकड़ के रकबे में ड्रिप और मल्ंिचग पद्धति को अपनाकर सब्जी की खेती में बेहतर आयाम स्थापित कर रहे हैं। किसान मनु नारला ने कहां कि धान और गेहूं की फसल शासन तंत्र के आधीन हो गई है। बड़े जतन से किसान खून-पसीना बहाकर फसल तैयार करता है। जब वह मंडी में बेचने के लिए जाता है तो दाम से लेकर विक्रय और भुगतान प्राप्त करने में उसे कितनी परेशानी होती है उसका मर्म सिर्फ वहीं समझता है। इसलिए उन्होंने धान और गेहूं की खेती से मुंह मोड़कर नकदी फसल याने की सब्जी में रूझान बढ़ाया और मुनाफा भी कमा रहे हैं। खास बात यह है कि मनु नारला जैविक और ऑर्गनिक खेती कर रहे हैं।

लहलहा रही वेनका टमाटर की फसल
किसान मनु नारला के खेत में इन दिनों वेनका टमाटर की फसल लहलहा रही है। ड्रिप और मल्चिंग पद्धित से पौने दो एकड़ में टमाटर की खेती किए हुए हैं। एक एकड़ में 70 हजार रुपए की लागत आई है। अभी आधी फसल भी आई और अबतक 2 लाख रुपए से अधिक का मुनाफा कमा चुके हैं। मनु ने बताया कि 140 से 190 दिन की यह फसल है। इस टमाटर की खासियत है कि इसमें किसी भी प्रकार का वायरस नहीं लगता। इसके अलावा मिर्ची, मटर, कलींदर, खरबूज, बैगन, गोभी, करेला, गिलकी, ककड़ी, लौकी शिमला मिर्च, सूरन, हल्दी, लहसुन में हाथ आजमा चुके हैं। जिसमें अच्छा खासा मुनाफा हुआ है। इसके अलावा गन्ना की भी बेहतर खेती कर चुके हैं। पपीता लगाने की तैयारी में हैं। किसान ने बताया कि 35 वर्षों से हर वर्ष बदल-बदल कर खेती करते हैं और उसमें तरकीब का उपयोग लाखों रुपए का मुनाफा कमाते हैं। मनु नारला खेती-किसानी में मिसाल बन गए हैं।

बिजली की झंझट से पाई मुक्ति
किसान मनु नारला ने बताया कि खेती के लिए 10 घंटे बिजली का दावा किया जा रहा है, लेकिन हमेशा अघोषित कटौती और अनाप-शनाप बिल से परेशान थे। उन्होंने 75 हजार रुपए की लागत से पांच हॉर्स पॉवर का सौर ऊर्जा प्लांट लगवाया है। इसका न तो बिल आ रहा ना ही मेंटेनेंस में कुछ खर्च हो रहा। पूरा दिन ड्रिप पद्धति और रैन गन के माध्यम से फसलों की सिंचाई कर उत्पादन कर रहे हैं। रैन गन की खासियत है कि इसमें कम पानी में सिंचाई हो जाती है और फसलों को बारिश की तरह पानी मिलता है। बगैर खास मेहनत के फसल की सिंचाई हो जाती है।

 

फसल में करते हैं खास विधि का प्रयोग
कृषक मनु नारला खेती में खास विधि का उपयोग करते हैं, ताकि उन्हें अपेक्षित आमदनी हो सके। उन्होंने कहा कि यदि किसान को जिस खेत में सब्जी वाली फसल लगानी हो उसे पहले अच्छे से जुताई कर लें, फिर उसमें गोबर की खाद और मिट्टी परीक्षण करवाकर उचित मात्रा में खाद डाल दें। खाद देने के बाद खेत में उठी हुई क्यारी बना लें। उसके ऊपर ड्रिप सिंचाई की पाइप लाइन को बिछा लें। पाइप लाइन बिछाने के बाद 25 से 30 माइक्रोन प्लास्टिक या घास-फूस की मल्च फिल्म जो कि सब्जियों के लिए बेहतर रहती है, उसे उचित तरीके से बिछा दें। फिर फिल्म के दोनों किनारों को मिट्टी की परत से दवा दें। इसे आप ट्रैक्टर की मशीनरी द्वारा भी दवा सकते हैं। यह प्रक्रिया होने के बाद प्लास्टिक मल्चिंग पर गोलाई में पाइप से पौधे से पौधे की दूरी तय कर छिद्र कर लें। किए गए छिद्रों में बीज या नर्सरी से तैयार पौध को रोपित कर सकते हैं। ड्रिप-मल्चिंग विधि से खेती करने के किसानों को कई सारे फायदे प्राप्त होते हैं। जिसमें सबसे अहम सब्जी की खेती में 50 प्रतिशत तक पानी की आवश्यकता कम हो जाती है। खेती में फसल के तने को कमजोर करने वाला खरपतवार पूरी तरह से नष्ट हो जाता है। मल्चिंग विधि द्वारा फसल में लगने वाला कीट पूरी तरह से नष्ट हो जाता है।

मल्चिंग और ड्रिप पद्धति से लाभ
-जरूरत के अनुरूप पौधों को प्रतिदिन पानी मिलता है।
– पानी को पूरे खेत में न भरकर केवल पौधों की जड़ के पास डाला जाता है।
– इस विधि से पानी की 70 प्रतिशत तक की बचत होती है।
-समय कम लगने से ईंधन अथवा बिजली की बचत होती है।
-उर्वरकों व रसायनों का प्रयोग वेंचुरी द्वारा पूरे खेत में न करके केवल पौधों के जड़ में किया जाता है।
-लगभग 30 प्रतिशत तक के उर्वरक की बचत होती है।
– इस पद्धति में खरपतवार न के बराबर होते हैं।
– पूरे खेत में पानी नहीं भराने से मिट्टी भुरभुरी व उपजाऊ बनी रहती है।
– फसल की जड़ों में हवा पहुंचती रहती है इससे गुड़ाई की जरूरत नहीं पड़ती है।
-पानी लगाने में, खाद देने में, निराई करने व गुड़ाई करने आदि में 50 प्रतिशत तक की मजदूरी लागत की बचत होती है।

तरीका बदला तो बढ़ गया मुनाफा
मनु नारला ने बताया कि वे बहुत साल से खेती कर रहे हैं वे पहले पारंपरिक तरीके से खेती करते रहे हैं, लेकिन अब उन्होंने आधुनिक तरीके को अपनाया है, जिसमें खासा मुनाफा कमा रहे हैं। उक्त किसान को उन्नत कृषक अवार्ड भी मिल चुका है। एक हेक्टेयर में 50 क्विंटल धान के उत्पादन का रिकार्ड भी इनके नाम है। किसान धान, गेहूं, दलहन, गन्ना के अलावा सूरन, हल्दी, टमाटर, बैगन, करेला, मिर्च, बरबटी, तुरई आदि इसी विधि से उगा रहे हैं। पहले की अपेक्षा अब कई गुना मुनाफा बढ़ा है।