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दोगुना हुई जलकर की वसूली फिर भी 30 फीसदी शहर प्यासा, पेयजल मुहैया कराने में फेल नगर निगम, देखें वीडियो

क आदमी के लिए प्रतिदिन 135 एलपीसीडी पानी की जरुरत होती है। कटनी शहर की आबादी 44 हजार परिवार में 2 लाख 30 हजार अनुमानित है। ऐसे में प्रतिदिन दोनों समय पर्याप्त मात्रा में पेयजल मुहैया कराने के लिए नगर निगम को लगभग 35 एमएलडी पानी देना चाहिए, लेकिन निगम मात्र 26.5 एमएलडी (मिलियन लीटर प्रतिदिन) सप्लाई दे पा रहा है।

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Balmeek Pandey

Nov 22, 2019

बालमीक पांडेय @ कटनी. एक आदमी के लिए प्रतिदिन 135 एलपीसीडी पानी की जरुरत होती है। कटनी शहर की आबादी 44 हजार परिवार में 2 लाख 30 हजार अनुमानित है। ऐसे में प्रतिदिन दोनों समय पर्याप्त मात्रा में पेयजल मुहैया कराने के लिए नगर निगम को लगभग 35 एमएलडी पानी देना चाहिए, लेकिन निगम मात्र 26.5 एमएलडी (मिलियन लीटर प्रतिदिन) सप्लाई दे पा रहा है। जानकर ताज्जुब होगा कि शहर की 30 से 40 फीसदी आबादी अब भी नगर निगम के पेयजल सुविधा से वंचित है। इतना ही नहीं पिछले चार साल से नगर निगम जलकर को 90 रुपये से बढ़ाकर सीधे दो गुना कर हर साल बढ़ोत्तरी कर रहा है, इसके बाद भी पर्याप्त पानी मुहैया नहीं कराया जा रहा। मजबूरी में लोग हैंडपंप या फिर जुगाड़ से पानी का इंतजाम कर रहे हैं। हैरानी की बात तो यह है कि लोगों को पर्याप्त मात्रा में व सभी को शुद्ध पेयजल मिले इसके लिए न तो निगम के अधिकारी संजीदा हैं और ना ही जनप्रतिनिधि।

इन क्षेत्र में गंभीर समस्या
शहर के लगभग एक दर्जन एरिया में पेयजल की गंभीर समस्या है। वार्ड नं. एक, कुठला, लमतरा, इंद्रानगर, एनकेजे, बजरंगनगर, प्रेमनगर, अमीरगंज, झिंझरी, भट्टा मोहल्ला, पन्नी कॉलोनी, पुरैनी, खिरहनी, सावरकर वार्ड, आधारकाप में पेयजल की समस्या गंभीर है, इसके बाद भी सप्लाई के प्रयास नहीं किए जा रहे।

 

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निगम के पास गंभीर चुनौती
पर्याप्त पानी न दे पाने के पीछे नगर निगम की मुख्य समस्या रॉ वॉटर की उपलब्धता का न होना है। एनबीडीए कैनाल का काम पूरा नहीं हो जाता तबतक स्थाई समाधान नहीं हो सकता। 2040 तक अनुमानित जनसंख्या 3 लाख 20 हजार के तहत 5 करोड़ लीटर प्रतिदिन देने का स्टीमेट बना है। 12 साल से काम चल रहा है। लगातार समयावधि बढ़ रही है, लेकिन अभी तक 30 फीसदी भी काम नहीं हुआ। टनल का काम नहीं हो पा रहा है, जिससे शहर की प्यास नहीं बुझ पा रही।

खास-खास:
– शहर में 12 हजार परिवार में अभी तक नहीं हैं नल कनेक्शन, गरीबी रेखा कार्ड होने पर एक हजार रुपये में महापौर नल कनेक्शन योजना से पहुंचाना था पानी, अभी तक 181 घरों में हुए कनेक्शन।
– कटनी नदी फिल्टर प्लांट से पांच बड़ी टंकी 20 से 30 लाख लीटर, दो-दो लाख लीटर की 22 टंकियों से हो रही सप्लाई, 140 नलकूपों का लिया जा रहा सहारा, फिर भी नहीं पर्याप्त पानी, नगर निगम सालाना बजट में 4 से 5 करोड़ रुपये कर रहा खर्च।
– अमृत योजना के तहत 2900 रुपये में कनेक्शन दिए जाने थे, तीन साल में मात्र 400 हुए हैं कनेक्शन, रुपये न जमा करने पर हर साल कट रहे 260 नल कनेक्शन।
– शहरवासियों को शुद्ध पेयजल की भी चुनौती है, क्योंकि पिछले छह साल से नगर निगम के पास कैमिस्ट नहीं हैं। अन्ट्रेंड कर्मचारियों के भरोसे ही पानी को शुद्धकर सप्लाई की जा रही है।
– सुबह प्रतिदिन एक घंटे व शाम को आधे घंटे होना चाहिए फोर्स के साथ सप्लाई, लेकिन पूरे शहर में 45 मिनट व 15 मिनट ही हो पा रही सप्लाई। अधिकांश वार्डों में दूसरे टाइम नहीं हो रही सप्लाई।
– घरेलू कनेक्शनों से पानी दोहन के कारण समस्या अधिक, मटमैला व लाल कलर के पानी से लोग परेशान, विवेकानंद वार्ड, अमीरगंज, एनकेजे रोशननगर में टंकियां निर्माणाधीन हैं।

 

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चार में ऐसे बढ़ा जलकर
2015- 90
2016-150
2017-158
2018-166
2019-174

यह हैं कनेक्शन
घरेलू कनेक्शन-25000
व्यवसायिक- 338

अपव्यय को रोकने नहीं प्रयास
नगर निगम द्वारा पानी के अपव्यय को रोकने के लिए सार्थक पहल नहीं की जा रही है। जगह-जगह मेन सप्लाईयों में रिसाव होने के कारण प्रतिदिन हजारों लीटर पानी व्यर्थ बह रहा है। इसके अलावा सार्वजनिक नलों में टोटियां व घरों में नल न लगे होने के कारण लाखों लीटर पानी का प्रतिदिन अपव्यय हो रहा है। एयरवॉल में लीकेज के कारण अधिक समस्या है, सीवर लाइन व लोगों के नुकसान पहुंचाने के कारण भी रिसाव बढ़ा है।

 

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बगैर मशीनों के नहीं पहुंचता पानी
शहर के अधिकांश लोग पेयजल सप्लाई से मशीनें लगाकर पानी खींचते है। इसकी मुख्य वजह है कि फोर्स के साथ सप्लाई न होना। इसका सबसे बड़ा नुकसान गरीब परिवार को हो रहा है। उसके पास मशीन न होने की दशा में निस्तार के लिए भी पानी नहीं मिल पाता।

इनका कहना है
शहर में 32 एमएलडी की आवश्यकता पर प्रतिदिन 26 एमएलडी पेयजल की सप्लाई हो रही है। कुछ क्षेत्रों में अभी सप्लाई के इंतजाम नहीं हैं। लोगों को पर्याप्त मात्रा में पेयजल मिले इसके लिए प्रयास हो रहे हैं। कैनाल से नदी में पानी आने के बाद भी समस्या का स्थाई समाधान हो पाएगा।
आरपी सिंह, आयुक्त नगर निगम।

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