कटनी. रेपिड एक्शन फोर्स-101 (आरएएफ) प्रयागराज शहर व जिले में भ्रमण कर दंगों से निपटने का मंत्र फूंक रही है। सोमवार को टीम कुठला थाना, एनकेजे थाना व क्षेत्र में पहुंची। यहां पर स्थानीय जनप्रतिनिधियों व रहवासियों के अलावा पुलिस के साथ टीम ने चर्चा की। यह टीम पूर्व में हुए दंगों के संंबंध में जानकारी ली, चाहे वे राजनीतिक हों या फिर विद्यार्थियों के या फिर सांप्रदायिक। इन्हें रोकने के लिए चर्चा की गई। जिले की भागौलिक स्थिति को भी टीम देख रही है। इस टीम को सतना व कटनी जिले की जिम्मेदारी मिली है। दंगा सहित अन्य प्राकृतिक आपदाओं से निपटने के लिए तैयारी की जा रही है।
फाइटिंग फोर्स में 60 अधिकारी-कर्मचारी हैं, जो एकसाथ एक स्थान पर पहुंचकर डाटा तैयार कर रहे हैं। 101 बटालियन के कमांडेंट मनोज कुमार गौतम के निर्देशन में असिस्टेंड कमांडेंट अवधेश कुमार के नेतृत्व में डाटा तैयार किया जा रहा है। टीम ने सोमवार को पुलिस अधीक्षक सुनील कुमार जैन से भी मुलाकात कर आवश्यक चर्चा की। एसपी ने आवश्यक निर्देश दिए। इस टी में 3 टीआइ, 3 जेएसआइ, आरक्षी व मुख्य आरक्षी शामिल हैं। कुठला थाना प्रांगण में रैपिड एक्शन फोर्स ने बैठक की। इस दौरान बाल गंगाधर तिलक वार्ड से पार्षद वंदना यादव, राज किशोर यादव, आकाश गुप्ता, सरला मिश्रा, संतोष मिश्रा, बाबा ठाकुर, लखन साहू आदि मौजूद रहे।
वार्षिक निरीक्षण के लिए पहुंचा सीआरपी दल
दंगों के प्रभावी नियंत्रण के लिए सीआरपी की टीम निरीक्षण के लिए कटनी पहुंची है। यह टीम साल में एक बार निरीक्षण के लिए आती है। एसपी सुनील कुमार जैन ने बताया कि दंगों के प्रभावी नियंत्रण व दंगे न हों उससे पहले ही स्थिति को काबू में किया जा सके, इस पर यह टीम डाटा तैयार करेगी। सहायक कमांडेंट सीआरपी अवधेश कुमार ने बताया कि रेपिड एक्शन फोर्स है। दंगों के प्रभावी नियंत्रण व दंगों की स्थिति पर नियंत्रण के लिए काम टीम काम करती है। सीआरपी भारत का सबसे बड़ा केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल है, जो की अर्धसैनिक बल के रूप में कार्य करता है। सीआरपी भारत सरकार के गृह मंत्रालय के अंतर्गत कार्य करता है। इनका मुख्य प्रयोजन दंगों के प्रभावी नियंत्रण और दंगो जैसी स्थिति को नियंत्रण करना हैं।
हर साल यह पहल होती है। कैसे इन घटनाओं को रोका जा सकता है, इसके लिए डाटा जुटाया जाता है। यह दल एक सप्ताह तक कटनी में रहकर पूरा प्लान तैयार करेगा। स्थानीय पुलिस को भी बारीकियां बताई जाएंगी कि कैसे अपराध पर नियंत्रण किया जा सकता है। यदि दंगे आदि की स्थिति कहीं पर नियंत्रित होती है तो उससे निपटने के लिए काम होता है। डाटा बेस के आधार पर आकस्मिक स्थिति पर काम होता है और प्रभावी ढंग से पुलिस व फोर्स दंगों को रोकती है। टीम ने रविवार को कोतवाली थाना पहुंचकर टीआइ अजय सिंह से चर्चा की आगे की रणनीति बनाई है।