कटनी. इंसान और जानवर के बीच का संघर्ष की कहानी अक्सर सुनते आए हैं। हम आपको उस जंगल में लेकर चलते हैं, जहां जानवरों में इंसानों से ज्यादा मानवीय भावना देखी जा सकती है।
विश्व प्रसिद्ध बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व के कोर क्षेत्र में बसे गढ़पुरी गांव में वन्यप्राणी-मानव द्वंद्व का सिद्धांत फेल है। दस से ज्यादा बाघों के मूवमेंट वाले घने जंगल के बीच बसे इस गांव मेंं बीते तीन दशक के दौरान बाघों के हमले से इंसानों के मौत का एक भी मामला नहीं है।
16 सौ आबादी वाले इस गांव के 65 साल के बुजुर्ग दुलारे बैगा को बाघों से डर नहीं लगता। वे बताते हैं कि बाघ को कई बार करीब से देखा है। हम खेती करते हैं और समीप में जंगल में बाघ विचरण करता है। बाघ के व्यवहार से एक ही बात सीखी है कि आप नहीं छेड़ोगे तो बाघ भी कुछ नहीं करेगा। बाघ बिना कारण इंसानों पर हमला करने लगे तो गांव खाली हो जाए।
इसी गांव में रहने वाले मथुरा यादव के पिता शंभू एक बार बाघ के हमले से बाल-बाल बचे थे, लेकिन इस बात का मलाल मथुरा को नहीं है। मथुरा बताते हैं कि पिताजी पर हमला भी तब हुआ था जब वे जंगल के अंदर भैंसों को चराने गए थे। उस समय शंभू यादव के बचाव में भंैसों ने बाघ से लड़ाई कर ली थी। बाघ दूर चला गया और पिताजी की जान बच गई। मथुरा कहते हैं कि यहां जो भी नुकसान हुआ है, वह जंगल के अंदर हुआ। बाघ कभी भी जंगल से बाहर निकलकर गांव के अंदर नहीं आए।
खितौली के रेंजर एनपी कार्तिकेयन गढ़पुरी गांव में बाघ और इंसानों के बीच के रिश्ते को मिसाल बताते हैं। उनका कहना है कि यहां मानव-वन्यप्राणी द्वंद्व का सिद्धांत फेल है।
बाघों के गढ़ बांधवगढ़ में वन्यप्राणी और इंसानों के बीच दोस्ती की नई इबारत लिखी जा रही है। यहां बच्चों और बाघ के बीच भी खास दोस्ताना है। वादियों में रहने वाले बच्चे ‘मोगली’ की तरह बहादुरी के साथ बाघों का सामना करते हैं।
बाघों को देखकर भी ऐसा लगता है जैसे वे बच्चों से अपनापन दिखा रहे हों। उनके चेहरे पर डराने वाले भाव नहीं दिखते। वे बच्चों को खेलता हुआ छोड़कर आगे बढ़ जाते हैं। इस बीच बच्चे न सिर्फ बेहिचक स्कूल आते-जाते हैं,बल्कि जंगल की पगडंडियों पर खेलते-कूदते रहते हैं।
तीसरी कक्षा में पढने वाले मयंक ने तीन बार बाघों को करीब से देखा है। छठवीं के रोहित का पांच बार बाघों से सामना हुआ है। दोनों की आंखे बाघ से मिली। उन्होंने चुहलबाजी भी की, लेकिन बाघ गुर्राए बिना आगे बढ़ गए। मिथिलेश, साधना और अंकुश तो खेल-खेल में बाघों की कद-काठी बताते हैं।