डब्ल्यूएचओ ने पीने के पानी के लिए पीएच स्तर 6.5 से 8.5 पीपीएम ( पार्ट्स पर मिलियन ) को आदर्श माना है। इसमें भी 7 को नैचुरल के मापदंड में रखा है। लेकिन शहरी क्षेत्र में दो दिन के भीतर 450 से अधिक सैंपल्स की जांच की गई। 90 फीसदी सैंपल में पीएच स्तर 7.9 से 8.34 पीपीएम मिला है। यानी हल्का क्षारीय है।
नालियों में बिछी पाइप पानी का बिगाड़ रहा स्वाद
निगम की टीम कहारवाड़ी में घर-घर जांच कर रही थी। टीम में जांच किट के साथ संगीता सोनी और अमृत-2 फिल्टर प्लांट की स्वाति नागौरी लोगों को किट की रिपोर्ट में पानी को पीने योग्य बताया। गुलसत्तर, इमरान के घर के पानी में पीएच 8.34 मिला। दुर्गंध नहीं मिली। टीडीएस 170, टर्बिडिटी 2.0 और क्लोरीन 0.5 रिकार्ड किया है। नागौरी से सवाल किया तो बताया कि फिल्टर प्लांट पर पीएच 7 पीपीएम है। जांच में 8.34 तक मिल रहा है। टीम में शामिल कर्मचारियों का मानना है कि नालियों में पाइप लाइन बिछी होने से पीएच स्तर में अंतर आ रहा है।
एक घंटे तक पार्षद का इंतजार करती रही जांच टीम
वार्ड-20 रामगंज में जांच टीम एक घंटे तक पार्षद का इंतजार करती रही। किट लेकर महिला कर्मचारी भी नहीं पहुंची। उपयंत्री आदर्श शर्मा और अमृत-2 के स्वाति नागौरी और मांगी सोलंकी ने महिला कर्मचारी से फोन पर बात की। तो पता चला कि महिला कर्मचारी सुंदर देवी अवकाश पर है। एक घंटे इंतजार के बाद सुंदर देवी किट लेकर रामगंज वार्ड पहुंची। इसी तरह वार्ड-12 में संगीता फूलमाली भी वार्ड में नहीं पहुंची थी। इनकी जगह वार्ड-11 की टीम भेजी गई।
पार्षदों के बताए जगहों पर ही जांच
टीम वार्डों में पार्षदों के बताए जगहों पर सैंपल ले रही है। इसको लेकर कुछ मोहल्लों में असंतोष जैसी स्थित बन रही है। कई जगहों पर पार्षद के देर से पहुंचने से प्रक्रिया धीमी चल रही है। रामगंज, कहार वाड़ी में पार्षद जांच टीम के साथ घूम रहे थे।
लीकेज सुधारने 20 लाख का टेंडर
निगम ने लीकेज सुधारने 20 लाख का टेंडर जारी किया है। छह माह के भीतर तीसरी बार टेंडर बुलाया है। दो बार टेंडर की निर्धारित राशि से 20 से 40 फीसदी बिलो टेंडर आने पर निरस्त कर दिया गया। तीसरे बार टेंडर निकाला है।
पंप का मेंटेनेंस करेगा निगम, 69 लाख का टेंडर
निगम चारखेड़ा पंप का मेंटेनेंस करेगा। अभी तक मेंटनेंस का कार्य विश्वा कंपनी कर रही थी। लेकिन कंपनी की अनदेखी के चलते अब निगम ने मेंटनेंस का कार्य अपने हाथों में ले लिया है। इसका चार्ज विश्वा के बिल से वसूल करेगी। निगम ने पंप स्थल पर सिविल वर्क लिए 27 लाख और मोटरें बदलने 42 लाख का टेंडर निकाला है। निगम आयुक्त प्रियंका सिंह राजावत का कहना है कि मेंटनेंस का कार्य निगम करेगा और खर्च कंपनी के बिल में कटौती करेगा।
इनका कहना : प्रियंका सिंह राजावत, आयुक्त, निगम
नगरीय क्षेत्र में पीएच, टर्बिडिटी समेत चार प्रकार की जांच की जा रही है। इसमें फिल्टर प्लांट और घरों में जलापूर्ति मापदंड के अनुरूप है। इन चारों की रिपोर्ट में कोई अंतर नहीं है। अंतर आने की स्थिति में बायोलॉजिकल जांच कराएंगे।