ट्रेन हादसा: बंगाल के 103 लोगों की गई है जान
कोलकाता. मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने बुधवार को कहा कि ओडिशा ट्रेन हादसे में मारे गए लोगों को हम जिंदगी नहीं दे सकते हैं लेकिन उनके परिजनों की मदद अवश्य कर सकते हैं। राज्य सरकार पीडि़तों को मुआवजे देने में 10 करोड़, 85 लाख और 40 हजार रुपए खर्च कर रही है। हमारी सरकार सभी को पूर्व घोषित मुआवजा देगी। सीएम ने 51 पीडि़तों को मुआवजे के चेक प्रदान किए।
उन्होंने आरोप लगाया कि ओडिशा में ट्रेन हादसे के कारणों को दबाने की कोशिश की जा रही है। बालासोर में दो जून को हुई भीषण रेल दुर्घटना की जांच सीबीआइ कर रही है लेकिन साक्ष्यों को पहले ही हटाया जा चुका है। वे ओडिशा ट्रेन दुर्घटना में मारे गए या घायल हुए राज्य के निवासियों के परिजनों को चेक और नियुक्ति पत्र सौंपने के लिए नेताजी इनडोर स्टेडियम में आयोजित राज्य सरकार के कार्यक्रम में बोल रही थीं। उन्होंने मारे गए लोगों के आश्रितों को होमगार्ड की नौकरी का नियुक्ति पत्र भी दिया। मुख्यमंत्री ने कहा कि इस घटना में पश्चिम बंगाल के 103 लोग मारे गए थे और उनमें से अब तक 86 की पहचान की जा सकी है। 172 को गंभीर चोटें आईं जबकि 635 को मामूली चोटें आईं।
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सच को दबा नहीं पाएगी सरकार
मुख्यमंत्री ने कहा कि भाजपा सरकार सच को दबा नहीं पाएगी। मैं चाहती हूं कि सच सामने आए। हादसे में घायल व मारे गए लोगों के परिजन भी हादसे का कारण जानना चाहते हैं। इतना बड़ा हादसा इन कोशिशों से नहीं छुपेगा। झूठ बोलने से आग नहीं बुझेगी। इसके लिए दोषी लोगों को कड़ी से कड़ी सजा मिलनी चाहिए। उन्होंने कहा कि मैंने पिछले कुछ दिनों में कटक और भुवनेश्वर के विभिन्न अस्पतालों में इलाज करा रहे घायलों और पीडि़तों को सहायता प्रदान करने के लिए दो बार ओडिशा का दौरा किया है।
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अब क्या बाथरूम में सीबीआइ करेगी छापेमारी
मुख्यमंत्री ममता ने बुधवार को निकाय नियुक्ति घोटाले के मामले में सीबीआइ के एक्शन पर सवाल उठाया। उन्होंने आरोप लगाया कि ट्रेन दुर्घटना की विभीषिका से ध्यान हटाने के लिए सीबीआइ को बंगाल में छापेमारी के लिए भेज दिया गया है। उन्होंने कहा कि केन्द्र सरकार ने ट्रेन हादसे की जांच की जगह सीबीआइ को बंगाल में तैनात कर दिया है। राज्य के नगर विकास विभाग में भी छापेमारी की। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि अब सीबीआइ की बाथरूम में छापेमारी का कदम ही बाकी है।
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इनको इतना मुआवजा
मृतकों के परिजनों को 5 लाख
गंभीर चोट लगने वालों को एक लाख
मामूली घायलों को 50 हजार रुपए
बचने वालों को 10 हजार, फिर 3 महीने तक प्रति माह दो हजार