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कोलकाता का नेताजी सुभाष चंद्र बोस एयरपोर्ट जिसने दुनिया को जोड़ा पश्चिम बंगाल से

कोलकाता के नेताजी सुभाष चंद्र बोस अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे के 100 साल पूरे होने पर शताब्दी समारोह की शुरुआत 21 दिसंबर को होगी। इस हवाई अड्डे पर कभी घास का मैदान हुआ करता था जबकि 1924 में मशाल जलाकर नाइट लैंडिंग की गई थी। कोलकाता हवाई अड्डे से 1924 में विमानों का संचालन शुरू हुआ था। हवाई अड्डा सूत्रों के अनुसार यह एक ऐसा क्षण था जिसने दुनिया को पश्चिम बंगाल से जोड़ा

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कोलकाता के नेताजी सुभाष चंद्र बोस अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे के 100 साल पूरे होने पर शताब्दी समारोह की शुरुआत 21 दिसंबर को होगी। इस हवाई अड्डे पर कभी घास का मैदान हुआ करता था जबकि 1924 में मशाल जलाकर नाइट लैंडिंग की गई थी। कोलकाता हवाई अड्डे से 1924 में विमानों का संचालन शुरू हुआ था। हवाई अड्डा सूत्रों के अनुसार यह एक ऐसा क्षण था जिसने दुनिया को पश्चिम बंगाल से जोड़ा। मूल रूप से दमदम हवाई अड्डे के नाम से जाना जाने वाला यह हवाई अड्डा श्रेष्ठता का प्रतीक है। यहां 20वीं सदी की शुरुआत में घास के रनवे वाला एक हवाई अड्डा बनाया गया था। इस पर 1924 में एक एयरलाइन रुकती थी, उसके बाद यह एक पूर्ण हवाई अड्डा बन गया। एएआई (कॉर्पोरेट संचार प्रबंधक) राजेश कुमार ने पत्रिका से बातचीत में कहा कि हवाई अड्डा के 100 साल पूरे होने के उपलक्ष्य में 21 दिसंबर को एक स्मारक टिकट और सिक्का जारी किया जाएगा। तीन महीने तक समारोह चलेगा। केंद्रीय नागरिक उड्डयन मंत्री राम मोहन नायडू इस मौके पर समारोह में खास तौर पर मौजूद रहेंगे। नायडू ने 13दिसंबर को नेताजी सुभाष चंद्र बोस अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे के शताब्दी समारोह के लोगो का अनावरण किया था। इस मौके पर एयरपोर्ट से उड़ान यात्री कैफे के पायलट प्रोजेक्ट को 21 दिसंबर को कोलकाता एयरपोर्ट पर लॉन्च किया जाएगा।