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कोलकाता

WEST BENGAL PARYUSHAN 2023-पर्युषण अध्यात्म का प्रतिनिधि, पर्व: मुनि जिनेश

खाद्य संयम दिवस के रूप में पर्युषण पर्व का शुभारंभ

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BENGAL PARYUSHAN 2023-कोलकाता/हावड़ा। पर्युषण धर्म का प्रायोगिक रूप है। पर्युषण अध्यात्म का प्रतिनिधि, पर्व है। यह एकमात्र आत्मलोचन का प्रतीक है। यह पर्व मनोरंजन का नहीं आत्मरंजन का पर्व है। जहां दुनियां के अधिकांश पर्व खा पीकर आमोद-प्रमोद के साथ मनाये जाते है वहीं यह पर्व त्याग, तपस्या द्वारा मनाया जाता है। मुनि जिनेश कुमार ने यह बात कही। मुनि जिनेश ठाणा-3 के सान्निध्य में पर्युषण पर्व का शुभारंभ खाद्य संयम दिवस के रूप में साउथ कलकत्ता श्रीजैन श्वेताम्बर तेरापंथी सभा द्वारा आयोजित किया गया। उपस्थित जन समुदाय को संबोधित करते हुए मुनि जिनेश ने कहा – मन को निर्मल बनाने का पथ है- धर्म। जैनों का यह विशिष्ट पर्व है। पर्युषण का अर्थ है- चारों ओर से सिमटकर एक स्थान पर निवास करना अथवा स्वयं में वास करना। पर्युषण आराधना के लिए 5 सूत्र अहिंसा, क्षमापना तेला तप, साधर्मिक वात्सल्य विशेष उपासना बहुत ही महत्त्वपूर्ण है। व्यक्ति को जीव हिंसा से बचना चाहिए। हिंसा की रोकथाम से पर्यावरण सुरक्षित रह सकता है।खाद्य संयम दिवस पर उन्होंने कहा कि शरीर को स्वस्थ रखने का एक महत्त्वपूर्ण उपाय है – खाद्य संयम। आहार से व्यवहार का निर्माण होता है।
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पर्युषण में पाप प्रवृत्ति का त्याग करें

मुनि परमानंद ने कहा – पर्युषण का अर्थ है-आत्मा के निकट रहना। पर्युषण में पाप प्रवृत्ति का त्याग करें। बाल मुनि कुणाल कुमार ने सुमधुर गीत का संगान करते हुए विचार व्यक्त किये। साउथ कलकत्ता श्रीजैन श्वेताम्बर तेरापंथी सभा के अध्यक्ष विनोद चौरडिया ने पर्युषण में अधिक से अधिक धर्म आराधना का आहवान किया। शुभारंभ तेरापंथ महिला मंडल साउथ कोलकाता एवं टांलीगंज के मंगलाचरण से हुआ।

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धन-धर्म का कोई संबंध नहीं: हीतप्रभ मुनि
बड़ाबाजार। धन और धर्म का आपस में कोई संबंध नहीं है। जिसके पास धन नही है वह व्यक्ति भी धर्म कर सकता है। ये कहना है बालमुनि हीतप्रभ मुनि का। वे श्वेताम्बर जैन के पर्युषण पर्व के प्रथम दिन श्रीबर्धमान जैन संघ में बोल रहे थे। उन्होंने कहा कि धर्म करने के लिए मन में भाव होना चाहिए। हीतप्रभ मुनि ने कहा कि हमें अहिंसा का पालन करते हुए दूसरों को भी प्रेरित करना होगा जिसकी शुरुआत घर से करनी चाहिए। मुनि ने कहा कि यह केवल कहने के लिए नही है बल्कि अपने आप को शांत करने के लिए है। मुनि ने कहा कि क्षमा मांगने के लिए पूरे वर्ष भर में एकमात्र मौका पर्युषण पर्व होता है। इस अवसर पर श्रीवर्धमान जैन संघ के संयुक्त सचिव मुल्तान सुराणा, विजय चन्द बैद, सुमेर बैगानी, महेंद्र डागा, दिलीप दुगड़ सहित अन्य उपस्थित थे।