
बैकुंठपुर। एसइसीएल चरचा कॉलरी की ईस्ट कोयला खदान में रविवार की रात को खदान हादसे में एक ठेका कर्मचारी की दर्दनाक मौत हो गई। मामले में ठेका श्रमिकों ने जमकर हंगामा किया और शव का पीएम करवाने से इंकार कर दिया। एसइसीएल अधिकारी आनन-फानन में पहुंचे और प्राइवेट कंपनी टीएमसी से चर्चा की। जिससे प्राइवेट कंपनी ने मृतक के परिवार को तत्काल २५ हजार और ३१ लाख मुआवजा देने घोषणा की।
जानकारी के अनुसार रविवार रात लगभग 10.30 बजे चरचा आरओ कालरी की खदान के भीतर कार्य करते समय हादसा हुआ। चर्चा ईस्ट कॉलरी के 13 इस्ट पैनल के हादसे में ठेका श्रमिक राजेश कुमार यादव(३२) निवासी कटगोड़ी की ड्यूटी करते समय मौत हो गई। कॉलरी में कोयला उत्खनन का ठेका टीएमसी कंपनी को मिला हुआ है। जिससे कंपनी कोयला खनन संबंधी समस्त कार्य करती है। हादसे के समय श्रमिक सेकंड शिफ्ट में केबल मैन के रूप में सीएम मशीन का केवल खींचने का काम कर रहा था। उसी दौरान साइड फॉल हुआ और राजेश सीएम मशीन से कोयला टकरा गया। जिससे उसके सिर में गंभीर चोट लगी। मामले में आनन-फानन में श्रमिक को खदान से बाहर निकालकर क्षेत्रीय चिकित्सालय चरचा पहुंचाया गया। इस दौरान अस्पताल के डॉक्टर्स ने मृत घोषित कर दिया। घटना के बाद चरचा क्षेत्र के ठेका श्रमिक आक्रोशित हो गए और जमकर हंगामा कर शव का पोस्टमार्टम कराने से इंकार कर दिया। भारी संख्या में क्षेत्रीय चिकित्सालय पहुंचकर विरोध प्रदर्शन करने लगे। इस दौरान चरचा के कुछ बाहरी नेताओं ने ठेका श्रमिक का शव निकालकर बाहर भेजने की कोशिश की थी। मामले को लेकर जमकर हंगामा हुआ और ठेका मजदूर मुआवजे की घोषणा कराने पर अड़ गए। श्रमिक बोले, मुआवजे की घोषणा नहीं होगी, तब तक श्रमिक के शव का पंचनामा नहीं कराएंगे और न ही कहीं जाने दिया जाएगा।
अनुभवी कर्मचारी बोले, १३ ईस्ट पैनल बहुत खतरनाक, कार्य करने लायक नहीं है
चरचा कॉलरी के एक अनुभवी कर्मचारी ने कहा कि टीएमसी कंपनी मनमाने तरीके से कार्य करा रही है। 13 ईस्ट पैनल बहुत खतरनाक है, वहां कार्य करने लायक नहीं है। यह जांच का विषय है कि इस पैनल में किस आधार पर कोयला उत्खनन किया जा रहा है। साथ ही कोयला उत्खनन की किस अधिकारी ने अनुमति दी है। चरचा में ठेका श्रमिकों का शोषण हो रहा है। अनुबंधित कंपनी मनमाने तरीके से 4 शिफ्ट में कोयला उत्खनन कर रही है। चार शिफ्ट में काम कराने के लिए किसी प्रकार की अनुमति भी नहीं ली गई है। दुर्भाग्य है कि एसइसीएल में ऐसे अधिकारी भी हैं, जो कार्यस्थल की जांच नहीं करते और अनुबंधित कंपनी के कागजों में हस्ताक्षर कर देते हैं। खान के अंदर डीपलरिंग का कार्य डीप से राइज की ओर होना चाहिए। किंतु चरचा कॉलरी में विपरीत राइज से डीप की ओर किया जा रहा है।
हंगामे के बाद मुआवजे की सार्वजनिक घोषणा, तत्कालिक सहायता राशि २५ हजार मिली
एसइसीएल प्रबंधन ने ठेका श्रमिकों के भारी आक्रोश को देख टीएमसी कंपनी के अधिकारियों को बुलाया और श्रमिक को मुआवजा राशि देने को लेकर दबाव बनाया। मामले में टीएमसी कंपनी द्वारा अंतिम संस्कार के लिए तत्कालिक तौर पर 25000 रुपए देने की बात कही गई। वहीं मुआवजे के रूप में 31 लाख देने की सार्वजनिक घोषणा की गई। मुआवजा राशि का सार्वजनिक घोषणा होने के बाद श्रमिकों ने शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजने पर सहमति दी। ऐसी चर्चा है कि चरचा कॉलरी में कोयला खनन करने वाली एसइसीएल से अनुबंधित टीएमसी कंपनी अपने पेटी कांट्रेक्टर को मैन पावर सप्लाई करने का काम दिया गया था। जिससे पेटी कांट्रैक्टर ने जितने भी ठेका श्रमिक कार्य में लगाए हैं। उनका बीमा नहीं करवाया गया। जो कि पूरी तरह एसइसीएल के अनुबंध नियमों का उल्लंघन है।
ठेका श्रमिक की मौत बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है। इस घटना की उच्चस्तरीय जांच के साथ दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्यवाही होनी चाहिए। एसइसीएल में ठेका श्रमिक मारे जा रहे हैं। जो कि चिंता का विषय है। सुरक्षा के प्रति प्रबंधन की कथनी और करनी पूरी तरह स्पष्ट है।
हरिद्वार सिंह, केंद्रीय महासचिव एटक यूनियन एसइसीएल